दादाजी धूनी वाले दरबार में मौजूद हैं 11वीं शताब्दी की प्रतिमाएं
3 दिसंबर को दादाजी धूनी वाले की मनाई गई पुण्यतिथि


भोपाल। राजधानी में मुख्यमंत्री आवास के सामने श्री दादाजी धूनी वाले दरबार की तपोस्थली स्थापित है। यह भोपाल का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल है। दादाजी धूनी वाले की 3 दिसंबर को पुण्यतिथि मनाई गई । 3 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम में बुधवार को अभिषेक हवन और भंडारे का आयोजन किया गया। 4 दिसंबर को सत्यनारायण भगवान की कथा आयोजित की जाएगी। साधक संत दादा भाई दादा जी धूनी वाले दरबार ने बताया कि उनका जन्म संत के घर हुआ, पूर्व संस्कारों की वजह से उन्होंने अध्यात्म का रास्ता अपनाया। श्री दादाजी धूनी वाले स्थल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह धार्मिक स्थल अति प्राचीन है। संतों की तपोस्थली है । इसकी 11वीं शताब्दी में स्थापना हुई तब से लगातार सिद्ध, साधक यहां पर साधना करते आ रहे हैं ।उन्होंने आगे बताया कि दादाजी ने संतों को अग्नि तत्व का ज्ञान दिया था । इस ज्ञान को हम आगे बढ़ा रहे हैं। भोपाल वाले दादाजी स्वामी रामस्वरूप ज्योतिषी वेदांताचार्य के द्वारा शुरू की गई पूजा अर्चना जिसमें सुबह, शाम नित्य हवन, त्रिकाल संध्या लगातार चली आ रही है। शुरुआत में एक माह तक पूर्णाहुति की गई थी और अग्नि प्रकट हुईं तब से लगातार हवन और पूजा अर्चना की जा रही है। प्रत्येक नवरात्रि सत्चंडी महायज्ञ पूजन हवन होता है । प्रतिमाओं के बारे में उन्होंने कहा कि यहां पर 11वीं शताब्दी के नरसिंह भगवान , हनुमान जी, दुर्गा मां का मंदिर, काली मां का मंदिर भैरव जी का मंदिर , नवग्रह मंदिर, गणेश मंदिर, नर्मदा मंदिर राधा कृष्ण मंदिर, श्री राम जानकी मंदिर,अर्धनारीश्वर मंदिर अन्नपूर्णा मैया का मंदिर ,संतोषी माता का मंदिर सभी प्रकार के देवी देवताओं की स्थापना की गई है।




