मानव दुर्व्यापार अपराध की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला

भोपाल, 21 अगस्त । महिला सुरक्षा शाखा द्वारा आज दिनांक 21.08.2025 को “मानव दुर्व्यापार अपराध की रोकथाम” हेतु 01 दिवसीय राज्यस्तरीय (ऑनलाईन) कार्यशाला का आयोजन प्रातः 10:30 बजे नवीन पुलिस मुख्यालय भोपाल स्थित सभागार में किया गया।
उक्त कार्यशाला में मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले के मानव दुर्व्यापार निरोधी इकाई (AHTU) के नोडल अधिकारी (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक), उप पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा) महिला थाना प्रभारी सहित प्रत्येक जिले से निरीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के (विवेचक) कुल 20-20 पुलिस अधिकारी ऑनलाईन कार्यशाला में सम्मिलित हुए। भोपाल नगरीय पुलिस के अधिकारी कार्यशाला में उपस्थित होकर सम्मिलित हुये।
उक्त कार्यशाला का शुभांरभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) श्री अनिल कुमार द्वारा किया गया। उन्होने उद्घाटन भाषण में कहा कि मानव दुर्व्यापार विषय को लेकर हमें और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। मानव दुर्व्यापार अपराध नहीं पाप है। उन्होने कहा कि इस दिशा में पुलिस ने कई सराहनीय कार्य किये है। गुना जिले से 16 बंधुआ मजदूरों को रेस्क्यू किया गया। रीवा जिले में “ऑपरेशन नन्हा बचपन” के अंतर्गत 06 माह के बच्चे को बचाया गया जिसमें सड़क किनारे परिवार के साथ सो रहे एक 06 माह के बच्चे को आरोपियों द्वारा अपहरण कर कल्याण मुंबई में पहले 08 लाख रूपये में बेचा गया, इसके पश्चात बच्चे को 29 लाख में रायगढ़ मुंबई में पुनः बेचा गया था। उन्होंने कार्यशाला में सम्मिलित पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि विधिक प्रावधानों के अनुसार मानव दुर्व्यापार से संबंधित अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रभावी अभियोग पत्र तैयार किये जावें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो पुलिस अधिकारी मानव दुर्व्यापार व बंधुआ मजदूरी की रोकथाम में उत्कृष्ट कार्य करेंगे, उन्हें विभाग द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
कार्यशाला में अंर्तराष्ट्रीय न्याय मिशन (आई० जे०एम०) से अधिवक्ता सुश्री रेनिता द्वारा मानव दुर्व्यापार की प्रवृतियों, प्रसार एवं मानव दुर्व्यापार के विभिन्न स्वरूप एवं इसे रोकने में पुलिस की भूमिका पर वक्तव्य दिया। उन्होंने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 एवं बन्धित श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम 1976 के प्रावधानों से भी अवगत कराया, साथ ही उन्होंने पुलिस की सकिय भूमिका पर प्रकाश डालते हुये कहा कि पीड़ित की पहचान, बचाव, पुनर्वास एवं दोषियों के विरूद्ध त्वरित कार्यवाही मानव दुर्व्यापार पर नियंत्रण के लिये अत्यंत आवश्यक है।
उक्त कार्यशाला में विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) द्वारा गंभीर अपराधों के पर्यवेक्षण के संबंध में मानक संचालन प्रकिया (SOP) पर विमर्श एवं समीक्षा कि गई। उन्होने बताया कि गंभीर अपराधों की प्रभावी निगरानी ओर पर्यवेक्षण से न केवल अपराधों की रोकथाम हो सकती है, बल्कि अपराधियों पर कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की जा सकती है। SOP की ब्रीफिंग के दौरान विमनि महिला सुरक्षा द्वारा प्रत्येक जिले के पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिये, ताकि मैदानी स्तर पर इस मानक संचालन प्रक्रिया का गंभीरता से पालन किया जा सके। साथ ही साथ यह भी बताया गया कि एफ०आई०आर० के बाद विवेचना के दौरान समस्त साक्ष्यों के संकलन एवं विश्लेषण के पश्चात पर्याप्त साक्ष्य के बाद ही अभियोग पत्र तैयार किये जाएँ।