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समाज के लोग अपने नाम में कोरी अवश्य लिखें- नारायण कबीरपंथी 

पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में समाज के लोगों से की अपील

भोपाल, 24 अगस्त। अखिल भारतीय कोली समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक राजधानी स्थित विधायक विश्राम गृह खंड क्रमांक 2 में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों आए  समाज के लोग शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी ने कहा कि हमारे समाज के लोग देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सरनेम से जाने जाते हैं। हमारी समाज के लोगों से अपील है कि भले ही आप कुछ भी सरनेम लिखते हो लेकिन अपने नाम के साथ कोरी अवश्य लिखें ताकि आपकी पहचान  और समाज की संख्या सुनिश्चित की जा सके।
नारायण कबीरपंथी ने कहा कि आज की बैठक में विभिन्न मुद्दों जैसे  समाज की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को लेकर मंथन किया गया।  हम किस राज्य में कितनी संख्या में है इस पर भी चिंतन किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद राज्य स्तर पर भी बैठक होती है वहां पर स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की जाती है।  कबीरपंथी ने कहा कि हम हमारा समाज अनुसूचित वर्ग में आता है । महाराष्ट्र में एससी -एसटी वर्ग में आते हैं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी ऐसी वर्ग में है लेकिन गुजरात में पिछड़ा वर्ग में आते हैं । उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर बैठक के बाद हम वहां की सरकारों के समक्ष अपनी समस्याओं को रखते हैं।  मध्य प्रदेश में हमारी संख्या 40 से 45 लाख है लेकिन राजनीतिक भागीदारी संख्या के हिसाब से कम है । स्वतंत्रता के समय कोरी समाज अनुसूचित वर्ग में था लेकिन प्रताड़ना की वजह से लोग सरनेम छुपा कर रखते थे, हम उनको जागरुक कर रहे हैं की हमारी मूल जाति कोरी अपने सरनेम के साथ जरूर लिखें ताकि पहचान हो सके और संख्या सुनिश्चित हो सके और हम अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठा सकें।

आज कोरी समाज का प्रदेश में मात्र विधायक है
नारायण कबीरपंथी ने कहा कि 1990 से कोरी समाज के चार विधायक रहे हैं परंतु आज मात्र एक विधायक है।  हमारे समाज की राजनीतिक निष्क्रियता के कारण राजनीतिक पार्टियों हमें काम आकलन करती हैं और समाज को उतनी राजनीतिक भागीदारी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि कोरी समाज एक भोली भाली जाती है, अधिकारों के लिए लड़ती नहीं है ना ही संघर्ष करती है । हमारी संख्या ज्यादा है लेकिन भागीदारी राजनीतिक भागीदारी कम है । कोरी समाज के लोग अपना मूल धंधा बुनकर का कार्य करते हैं, हम अपनी पहचान बताने में पीछे है इस बात पर मंथन किया जा रहा है ताकि हमारी मूल संख्या और स्थिति स्पष्ट हो सके।

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