मान-कषाय मीठे जहर की तरह होता है_पंडित अरविन्द जैन शास्त्री

व्यवहार की विनम्रता ही मार्दव धर्म कहलाती है।
श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, साकेत नगर में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व, दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की विशेष पूजा आराधना की गई। नित्य नियम पूजन-अर्चन, अभिषेक, विधान आदि के उपरान्त दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन पं. अरविन्द जी शास्त्री (रांची) ने जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र का विवेचन करते हुए कहा कि वनस्पति में भी प्राण होते हैं। जैन शास्त्रों में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं वनस्पतियों को स्थावर जीव कहा गया है, इन्हें भी अन्य जीवों की भाँति सुख-दुःख का अनुभव होता है। हमें इस सभी प्राकृतिक तत्वों पर भी करुणा भाव रखकर इनकी रक्षा करना चाहिए। शास्त्री जी ने अपने प्रवचन में उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विचारों और भावों की कोमलता या मृदुता ही मार्दव धर्म है। व्यवहार की विनम्रता ही मार्दव धर्म कहलाती है। बिना अहंकार का त्याग किये कभी भी भावों में मृदुता नहीं आ सकती। अहंकार एक मीठे जहर की तरह होता है। हमें अपनी संपत्ति, पद, प्रतिष्ठा, शरीर के सौंदर्य, बुद्धि और बल का कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार करने वाला कभी भी पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता वहीं विनय मोक्ष का द्वार होता है। हेमलता जैन ‘रचना’ ने बताया कि पर्युषण पर्वाधिराज के द्वितीय दिवस पर मंदिर जी में समाज के अनेक पुण्यशाली भव्यजनों ने पूजन, अभिषेक, शांतिधारा करने का परम सौभाग्य प्राप्त किया। जैन मंदिर साकेत नगर में दसलक्षण पर्व पर अनेकों धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ही समाज के सभी आयु वर्ग के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है उसी के अन्तर्गत कहानी प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी वाक कुशलता का परिचय देते हुए सामाजिक/धार्मिक/नैतिकता का सन्देश देती हुयी कहानियों को सुनाकर सभी का मन मोह लिया।
ज्ञातव्य है कि साकेत नगर जैन मंदिर जी में पर्युषण के अवसर पर बाहर से पढ़ने आये विद्यार्थियों, कामकाजी पुरूष/महिलाओं/बुजुर्गों सहित सभी साधर्मी बंधुओं जिन्हें पर्व के दौरान शुद्ध भोजन प्राप्ति हेतु तकलीफ होती है, को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी 50/- की टोकन राशि पर सुबह 10:30 से 1 बजे तक एवं सांयकाल 5 बजे से 6:30 बजे तक शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है। मंदिर जी की भोजन शाला में आज भी 250 से अधिक लोगों ने शुद्ध भोजन का आनंद लिया। नरेंद्र टोंग्या, शरद जैन, अमिताभ मन्या, सुनील जैन NHDC आदि द्वारा अपने हाथों से भोजन परोस कर खिलाया जा रहा है, इसके साथ ही समाज सेवा की तरफ एक और कदम आगे बढ़ाते हुए, समाज के वृद्धजन जो कि मंदिर आने-जाने में सक्षम नहीं हैं के लिए मंदिर अध्यक्ष नरेंद्र टोंग्या ने अपनी तरफ से वाहन की व्यवस्था भी की है।