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न्यू अर्बनिज़्म पॉलिसी में झलकता ‘कमाल का भोपाल’ विज़न

भेल भोपाल के लार्जेस्ट लैंड-बैंक को क्वांटम टेक कैपिटल में बदलने का बड़ा अवसर

राजधानी भोपाल को नई पहचान दिलाने वाली इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी 2025 अब न्यू अर्बनिज़्म की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। भेल की हज़ारों एकड़ रिक्त भूमि को क्वांटम टेक्नोलॉजी कैपिटल और स्मार्ट टाउनशिप के रूप में विकसित करने का अवसर राजधानी क्षेत्र को ऐतिहासिक बढ़त दिला सकता है। —

मध्यप्रदेश सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी 2025 के नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस नीति में ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और अनेक प्रोत्साहन शामिल हैं, जिनसे राज्य और राजधानी के मेट्रोपॉलिटन रीजन को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

पॉलिसी के तहत सिंगल विंडो क्लीयरेंस, 60 दिनों में अनुमोदन, लैंड पूलिंग, ग्रीन एरिया और नवीकरणीय ऊर्जा पर अतिरिक्त एफएआर, तथा किफायती आवास पर छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं। साथ ही वर्क-टू-वॉक मॉडल को अपनाते हुए टाउनशिप में आवासीय, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, उद्योग और वाणिज्यिक केंद्रों को साथ विकसित करना अनिवार्य होगा।

राजधानी भोपाल के लिए यह नीति ऐतिहासिक महत्व रखती है। भीषण औद्योगिक त्रासदी के चार दशक बाद, सदमे से उबर रहे शहर के पास भेल की 2200 एकड़ रिक्त भूमि ऐसा लैंड बैंक है जो किसी भी भारतीय महानगर के बीच उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस भूमि पर एआई लाइटहाउस, क्वांटम कम्प्यूटिंग हब और स्मार्ट इंडस्ट्री टाउनशिप विकसित होकर भोपाल का भविष्य पूरी तरह बदल सकता है।

अन्य राज्यों और देशों के उदाहरण भी इसकी पुष्टि करते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में टाउनशिप पॉलिसियों ने निवेश आकर्षित किया है, जबकि दुबई और सिंगापुर ने “वर्क-लिव-लीजर” मॉडल से वैश्विक पहचान बनाई। एमपी की नई नीति इन्हीं बेस्ट प्रैक्टिस को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालकर और भी आधुनिक रूप में लाई गई है।

‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक का कहना है—
“न्यू अर्बनिज़्म के ये नीति-नियम भोपाल को भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी कैपिटल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। राजधानी को प्राप्त यह अवसर शहर को फ्यूचर-रेडी रीजन में बदल देगा। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान की ओर से हम मुख्यमंत्री, मुख्य-सचिव सहित शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हैं।

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