एनसीईआरटी के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल में आज छत्तीसगढ और मध्यप्रदेश के कलाकारों द्वारा खिलौनें और पुतलीकला पर चल रही पांच दिवसीय एकाग्र कार्याशाला का समापन हो गया।


कार्यशाला के समन्वयक डाॅ.सुरेश कुमार मकवाणा ने बताया कि इस पांच दिवसीय कार्यशाला में मुख्यतया छत्तीसगढ की परंपरागत कलाओं का प्रदर्शन मिट्टी ,बांस , धान, पत्थर और स्क्रैप से कला कृतियों का निर्माण करके किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरुप विकसित आधारभूत स्तर की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रुपरेखा-2022 के अध्याय 4 के सेक्शन 4.4 में शिक्षण विज्ञान के अंतर्गत बच्चों के अधिगम में वृद्धि के लिए खेल के माध्यम से सीखने पर विशेष बल दिया गया है जिसमें बातचीत, कहानियाँ, खिलौने, संगीत, कला और शिल्प को शिक्षण अधिगम का बेहतरीन माध्यम बताया गया है। अपने समापन उद्बोधन में संस्थान के प्राचार्य प्रो.शिव कुमार गुप्त ने कहा उक्त कार्यशालाएं शिक्षा संस्थान के शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को अपने अध्यापन को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने ऐसी कार्यशालाओं के दस्तावेजीकरण व दूरदराज के आए कलाकारों को पहचान दिलाने के लिए संस्थान के सहयोग का भरोसा दिलाया। इस कार्यशाला में संस्थान के आईटीईपी पाठ्यक्रम में अध्यनरत विद्यार्थियों ने भी मिट्टी,लकड़ी, बांस स्क्रैप और पत्थर आदि से से खिलौनों बनाने का हुनर कलाकारों के साथ के सानिध्य में सीखा। विस्तार शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर रत्नमाला आर्या ने सभी कलाकारों को प्रशस्तिपत्र वितरित कर कार्यशाला को सफल बनाने के लिए बधाई दी। डाॅ.सुरेश मकवाणा ने कार्याशाला के सफल आयोजन के लिए सभी कलाकारों संकाय सदस्यों व विद्यार्थियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।सभी का इस अवसर पर संस्थान के डीन प्रो.जयदीप मंडल प्रो.चित्रा सिंह,डाॅ.श्रुति त्रिपाठी, डाॅ.मोनिका, डाॅ राजकुमार वर्मा, डाॅ.प्रदुम्न सिंह,डाॅ.व्यंकट सूर्यवंशी सहित संस्थान के अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे।


