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विनीता चौबे के नए संग्रह ‘परछाईं’ का गरिमामय लोकार्पण

आईसेक्ट पब्लिकेशन एवं वनमाली सृजन पीठ के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के सभागार में वरिष्ठ लेखिका विनीता चौबे के कहानी एवं कविता संग्रह ‘परछाईं’ का लोकार्पण साहित्यिक गरिमा और आत्मीय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुकेश वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बलराम गुमास्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में नीलेश रघुवंशी,  निरंजन श्रोत्रिय और डॉ. अनीता सक्सेना ने अपने विचार साझा किए। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार  संतोष चौबे का विशेष आत्मीय सान्निध्य रहा। मंच पर लेखिका विनीता चौबे भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ लेखिका विनीता चौबे के कविता पाठ से हुआ, जिसने श्रोताओं को संग्रह की भावभूमि से परिचित कराया। स्वागत वक्तव्य वनमाली सृजन पीठ की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति रघुवंशी ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने रचना और रचनाकार दोनों के महत्व को रेखांकित किया।
इस दौरान अपने वक्तव्य में अनीता सक्सेना ने कविताओं के आंतरिक रस का मधुर और सरस वर्णन किया। वहीं, निरंजन श्रोत्रिय ने वर्तमान समय में परिवारिक विघटन की चर्चा करते हुए कविताओं में जीवन की मीठी और जीवंत स्मृतियों को विस्तार से बताया और कवि के आशय को स्पष्ट करते हैं। नीलेश रघुवंशी ने कहा कि विनीता चौबे घर-परिवार के बिंबों के माध्यम से स्त्री जीवन की आशाओं, अपेक्षाओं और संघर्षों का सूक्ष्म रेखांकन करती हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि उनकी रचनाओं में भारतीय स्त्री का संसार विद्रोह की मुखर अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और पहचान की शांत, लेकिन दृढ़ चाह के रूप में सामने आता है, जिसकी झलक ‘सुई’ जैसी कहानी में स्पष्ट दिखाई देती है।
इस अवसर पर संतोष चौबे ने कहा कि विनीता चौबे की कविताओं की सबसे बड़ी शक्ति उनकी ईमानदारी और सहजता है। वहीं मुख्य अतिथि बलराम गुमास्ता ने संग्रह की कविताओं में निहित मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं की गहराई और जीवन के प्रति करुण दृष्टि को रेखांकित करते हुए इसे समकालीन साहित्य की एक सशक्त उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुकेश वर्मा ने कहा कि कविता का अद्वैत मानवीय संबंधों की पारस्परिकता, एकात्मता और मन को छू लेने की क्षमता में निहित होता है। यही अद्वैत भाव विनीता चौबे की कविताओं में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि विनीता जी बड़ी-बड़ी दार्शनिक बातें कहने के बजाय घर-संसार की छोटी, लेकिन जीवंत अनुभूतियों के माध्यम से मनुष्य की संवेदनाओं को स्पर्श करती हैं।
कार्यक्रम के अंत में स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. विशाखा राजुरकर ने किया।

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