भोपाल ०२ जनवरी। आज रवीन्द्र भवन में श्री मोहन भागवत का उद्बोधन बहुत महत्वपूर्ण व प्रभावी एवं आत्मगौरव जागृत करने वाला रहा।



मंच पर श्री मोहन भागवत, श्री अशोक पांडे एवं ….रहे। कार्यक्रम का आरंभ भारत मस्त एवं गुरु गोलवरकर जी को पुष्पांजलि एवं गीत “संघ चरण चल रहे, विराट हिन्दू राष्ट्र के” से हुआ। उन्होंने कहा कि संघ के बारे में नरेटिव बहुत गढ़े गए। परंतु संघ कितनी अनोखी पद्धति से चला है वह थोड़ा बहुत महात्मा बौद्ध के कार्य से समझा जा सकता है।
यह पैरा मिलिट्री कार्यक्रम नहीं है, सर्विस संगठन भी नहीं है पर इसके जैसा कोई नहीं है अतः मनघड़ंत विरोध अधिक करते हैं इसलिए संघ के बारे में गलत फहमियां बहुत हैं।
सत्य आपके सामने रखूंगा आप तथ्य के माध्यम से संघ को समझें।
डॉ हेडगेवार ने स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता की। वे समाज के व्यवहारों क्रिया कलापों का, प्रवृत्ति का, प्रतिक्रिया का अध्ययन करते थे सुभाष चंद बोस और अन्य क्रांतिकारियों से वे इस जनभावना की चर्चा भी करे थे।
हूंडो के आक्रमण से देश पर आक्रमण हुए, अंग्रेज तो बहुत बाद में आए।
विचार करना चाहिए कि ये आक्रमण बार बार क्यों होते हैं। आज हम में एकता नहीं है
हम एक हैं इसको पहचाने आज एक साथ खड़ा रहेगा तो देश का भाग्य बदल जाएगा।
आत्मबोध छोटे की हम पहचाने की ग़म कौन हैं? डॉ हेडगेवार ने प्रयोगों के अनुभव के आधार पर एकता और गुणवत्ता हेतु कार्यप्रणाली विकसित की और विजय दशमी के दिन १९२५ में संघ की स्थापना की व्यवस्थित कार्य प्रणाली १९३९ में लागू की।
संघ कभी किसी के विरोध या स्पर्धा में नहीं है। संघ की इच्छा है कि पूर समाज ही एकता में निबद्ध गुणवत्तापूर्ण समाज होना चाहिए। हिंदू की विशेषता है सर्व समावेशिता।
पंजाब के शहर में बाबर का हमला हुआ। गुरु नानक देववहां थे इस समय के बारे में वे कहते हैं कि उस समय इतना खून खराबा हुआ कि न हिंदू औरतों की अस्मत बची मुस्लिमों की।
इस समय गुरु नानक देव ने सभी मत मानने वालों को हिंदू कहकर पुकारा छे वे वैष्णव, बौद्ध शेव कुछ भी हों। उन्होंने कहा कि आदमी को अलग अलग रस्तों से एक ही जगह जाना हैअनुष्य अपनी प्रकृति अनुसार राह चुनता है पर भारत में धर्म सबका एक है पंथ कोई भी है। जिनसे धर्म छूटता है, राष्ट्र छूट जाता है। धर्म अनुसार मोक्ष हेतु संतुलन चाहिए, संयम चाहिए।
भारतीय एक स्वभाव है, मात्र भूगोल नहीं। हिंदू होने से हम सब जुड़ सकते हैं जाती कोई भी हो। भारत पर संकट आता है तो हम एक जुट होते हैं। जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया उनको सब सम्मान की दृष्टि से देखते हैं चाहे वे किसी भी पंथ के हों। चार प्रकार के हिंदू हैं एक गर्व से कहो हम हिंदू हैं। दूसरा कहता है गर्व की क्या आवश्यकता है, तीसरे कहते हैं कि घर आएं तब बताऊंगा कि मैं हिंदू हूं। चौथे वे जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं,वे ही चौथे ही विरोध कार्य हैं। पहले और दूसरे को पहले संगठित करें शेष को बाद में कर लेंगे। जो भूल गए हैं उनलोभी बाद में याद आ जाएगी। समाज ही देश का भाग्य निर्धारित करता है। आज की देशों में उत्थान पतन हुआ है।
जिन देशों में एकता और गुणवत्तर कमी आई उन देशों का पतन हो गया जिनमें ऐसा नहीं हुआ उनका उत्थान हुआ।
संघ की शाखाओं में अनुशासन, संयम और गौरव की शिक्षा दी जाती है, संघ इतना मात्र है, संघ मात्र इतना ही है। आज भी समाज महाजनों का अनुकरण करता है। क्योंकि निस्वार्थ बुद्धि और उच्च चरित्र उनके पास हैं इसलिए समाज उनको मानता है। लोग सोचते हैं कि शिवाजी महा राज जैसे चाहिए पर हमारे घर में नहीं। संघ का उद्देश्य ऐसे ही व्यक्ति तैयार करना है।
स्वयं सेवक स्वतंत्र होते हैं कोई बंधन नहीं पर उनको लक्ष्य हम देते हैं। विद्या भारती, बी जे पी, ये सब संघ नहीं हैं, लोग भ्रमित हैं। सबकी स्वयं में स्वतंत्रता है।
संघ चलाना तो समर्पण का कार्य है। इसमें कुछ मिलता नहीं है, हो सकता है अपने पास से चला जाए इसलिए कुछ पाने की इच्छा से संघ में न आएं। आज संघ में धन नहीं है पर अभाव नहीं है और प्रभाव भी नहीं है। आज सौ वर्ष से संघ इसी त्याग से चल रहा है।
संपूर्ण संगठन क्षमता के साथ धर्म को बचाते हुए हमारे भारत की रखा करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए।
अपने समाज में जितना बुरा हो रहा है उससे चालीस गुना अधिक अच्छा हो रहा ही सज्जन व्यक्ति सब समाजों में हैं बस उनको ये पता होना चाहिए कि हम अकेले नहीं हैं इसलिए हम ऐसे अच्छे लोग एक जुट हों और पूरक बन का काम करें। ये केवल जुड़ जाएं बस इतने से ही समाज में पंच परिवर्तन हो जाएगा जो हमारा ध्येय है।
इसके लिए जो विंदू हैं वे हैं सामाजिक समरसता। आपस में सुख दुख में साथ रहें इससे ये होगा। पारिवारिक समरसता
हफ्ते में एक दिन सब लोग घर में रहकर श्रद्धा पूर्वक भजन करें और घर में बना भोजन करें। चर्चा करें, निर्णय लें और कुल की कीर्ति बने रहे इसके लिए विमर्श करें। सोचें कि देश के लिए जो आवश्यक है वह हमारे परिवार में है, या नहीं। उतने समय मोबाइल बंद रखें।
मंदिर और शमशान सबके लिए खुले रहें।
समाज के लिए समय देना। पर्यावरण, प्रदूषण के लिए कार्य। पॉलीथिन सिंगल यूज प्लास्टिक हटाने के कार्य, हरियाली बचाने के कार्य, स्वबोध के आधार पर अपनी चौखट के अंदर अपनी भाषा अपना भोजन अपना अपनी वेश भूषा, अपना भजन, अपने संविधान के नियमों की चर्चा जिससे सभी को ज्ञान रहे, सामाजिक नियमों की चर्चा, परंपरागत सामाजिक अच्छे नियमों की चर्चा, अपने भवन, के लिए अपने वे कार्य जो हम अपनी पहचान बनाए रखते हैं उसके लिए कार्य करें। विदेशी
भाषा नहीं कोई एक प्रांतीय भाषा का ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास।
यदि मेरी बातें समझ में न आएं तो संघ से जुड़कर देखें
हमें अपने देश को बड़ा बनाने का काम हमें ही करना है, कोई दूसरा नहीं करेगा।



