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मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, ई- गवर्नेंस की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

पूर्व वर्षों की तुलना में लगभग ढाई से तीन गुना आवेदनों की हुई प्रोसेसिंग घर बैठे आवेदनों के ऑनलाइन सत्यापन से 2 हज़ार से अधिक को मिला फार्मासिस्ट लाइसेंस

मध्य प्रदेश सरकार नागरिक सेवाओं को सरल सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। राज्य शासन की मंशानुसार मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने अपनी सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है। दवा ट्रैकिंग, ऑनलाइन लाइसेंसिंग जैसी डिजिटल प्रणालियों के सफल क्रियान्वयन से समस्त स्टेकहोल्डर्स को सहजता से सुविधाएं प्राप्त हो रही है।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा किया गया यह डिजिटल नवाचार राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केन्द्रित सेवा की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है। परिषद मैनुअल एवं विवेकाधीन व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए नियम-आधारित, स्वचालित एवं तकनीक-संचालित प्रणाली की ओर सफलतापूर्वक अग्रसर हुई है। फार्मासिस्ट पंजीकरण एवं नवीनीकरण की प्रक्रियाओं का सरलीकरण, पारदर्शिता एवं समयबद्धता युवाओं और पेशेवरों को सुविधा प्रदान कर रही है, साथ ही मजबूत एवं विश्वसनीय डेटाबेस के निर्माण में भी सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने परिषद के सदस्यों, विभागीय अधिकारियों को इस प्रयास के लिए बधाई दी है और पारदर्शिता के साथ उच्च गुणवत्ता की सुविधाओं का सतत रूप से प्रदाय सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष  संजय जैन ने बताया कि फार्मासिस्ट पंजीकरण, नवीनीकरण एवं फार्मेसी पंजीकरण से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध, नागरिक-केन्द्रित एवं विधिसम्मत बनाने के उद्देश्य से व्यापक डिजिटल एवं प्रणालीगत सुधार लागू किए गए हैं। ये सभी सुधार फार्मेसी अधिनियम, 1948 एवं फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों के अनुरूप हैं, जिससे परिषद की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं आधुनिक बनी है।

वर्ष 2023 में 2 हज़ार 889, वर्ष 2024 में 2 हज़ार 297, जनवरी से मई 2025 के दौरान 970 तथा जून से दिसंबर 2025 के दौरान 5 हज़ार 536 प्रकरणों का निराकरण किया गया। वर्ष 2025 में कुल 6,500 से अधिक प्रकरणों में कार्यवाही पूर्ण की गई। इसी अवधि में परिषद द्वारा 8 हज़ार से अधिक आवेदन-पत्रों की प्रोसेसिंग की गई, जो कि पूर्व वर्षों की तुलना में लगभग ढाई से तीन गुना अधिक है।

नई डिजिटल एवं पूर्व-सत्यापन आधारित प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप 2 हज़ार 199 अभ्यर्थियों को परिषद कार्यालय आए बिना, घर बैठे ही पंजीकृत फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र जारी किया गया। इस प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन डिजीलॉकर से, आवेदक की पहचान का सत्यापन समग्र आईडी, डोमिसाइल एवं एफडीए लाइसेंस के एपीआई के माध्यम से स्वचालित रूप से किया जा रहा है, जिससे अभ्यर्थियों के समय, यात्रा एवं आर्थिक व्यय में उल्लेखनीय बचत हुई है।

पूर्व में पंजीकरण एवं नवीनीकरण की प्रक्रियाएँ मैनुअल एवं कागज़-आधारित थीं, जिनमें बिना पूर्व-सत्यापन के आवेदन स्वीकार किए जाते थे और दस्तावेज़ों का अनिवार्य भौतिक सत्यापन किया जाता था। शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन डाक अथवा मेल के माध्यम से कॉलेजों से प्राप्त होने के कारण प्रकरण लंबे समय तक लंबित रहते थे। इसके परिणामस्वरूप लंबित मामलों में वृद्धि, अत्यधिक कागज़ी कार्य, कर्मचारी के विवेक पर निर्भरता और डेटा असंगति जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं।

वर्तमान व्यवस्था में पंजीकरण, नवीनीकरण एवं सुधार के लिए पूर्णतः ऑनलाइन एवं मानकीकृत मॉड्यूल लागू किए गए हैं। पंजीकरण में पूर्व-सत्यापन के बाद ही आवेदन एवं शुल्क भुगतान की सुविधा प्रदान की गई है। नवीनीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है तथा नाम, पिता का नाम अथवा जन्मतिथि में अंतर होने की स्थिति में सॉफ्ट वेरीफिकेशन के माध्यम से आवेदन की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त, नाम, पिता का नाम एवं जन्मतिथि जैसी प्रविष्टियों में सुधार हेतु समर्पित ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल के माध्यम से लीगेसी डेटा को शुद्ध एवं अद्यतन किया जा रहा है। इन डिजिटल एवं प्रणालीगत सुधारों के परिणामस्वरूप लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, डेटा की गुणवत्ता, एकरूपता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है और प्रशासनिक भार में कमी के साथ-साथ पारदर्शिता एवं जवाबदेही में वृद्धि हुई है। एक मजबूत, सुरक्षित एवं भविष्य-उन्मुख डिजिटल डेटाबेस का निर्माण किया गया है।

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