कथाकार कमलेश्वर को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया
साहित्यकार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समग्रता में अभिव्यक्त करती है प्रश्नोत्तरी गोकुल सोनी मुंशी प्रेमचंद के बाद यदि किसी श्रेष्ठ कहानीकार को याद किया जाए तो वे कमलेश्वर ही हो सकते हैं।सुरेश पटवा


दुष्यन्त संग्रहालय के राजसदन में स्व. सुप्रसिद्ध कथाकार श्री कमलेश्वर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुचर्चित कथाकार पंकज सुबीर ने की, मुख्य अतिथि कमलेश्वर के दामाद एवं दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी, विशेष अतिथि, कमलेश्वर की सुपुत्री श्रीमती ममता त्यागी (कमलेश्वर) रहे। क्विज मास्टर जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को रूपरेखा दी वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेश पटवा रहे।
निर्णायक मंडल में वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोकुल सोनी, डॉ विमल कुमार शर्मा, एवं श्रीमती सुधा दुबे रहे। स्वागत उद्बोधन संग्रहालय की निदेशक करुणा राजुरकर ने दिया
कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धियों के पांच समूह बनाए गए जिनके नाम कमलेश्वर जी की चर्चित कृतियों के नाम पर “काली आंधी”, “यादों के चिराग”, “जलती हुई नदी” “अधूरी आवाज” और “रेत पर लिखे नाम” नामक समूह बनाए गए। इस समूह में काली आंधी में सत्यदेव सोनी सत्य, श्रीमती शशि बंसल ,कमलेश नूर, प्रेक्षा सक्सेना ,प्रतिभा श्रीवास्तव और राजेश विश्वकर्मा शामिल थे ।समूह दो यादों के चिराग में मनोज गुप्ता ,लक्ष्मीकांत जवणे, प्रदीप श्रीवास्तव, सुरेश शर्मा ,अरुण गुप्ता, मधु भूषण सिंघल शामिल थे ।समूह तीन जलती हुई नदी में रूपाली सक्सेना, वर्षा चौबे ,बिहारी लाल सोनी प्रतिभा द्विवेदी ,अपर्णा पात्रीकर और अभिलाषा श्रीवास्तव शामिल रही, चौथे समूह अधूरी आवाज में वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अनिल खरे के के श्रीवास्तव, श्रीमती कविता शिरोले, वीणा विद्या गुप्ता और रेनू श्रीवास्तव शामिल थी। समूह पांच रेत पर लिखे नाम में श्रीमती मृदुल त्यागी ,अनीता खरे, सीमा स्वरांगिनी खरे और मंजू गुप्ता शामिल थी।
इन समूह में प्रथम -यादों के चिराग, द्वितीय- काली आंधी और तृतीय- अधूरी आवाज रही. इन समूहों को क्रमशः ₹1001, ₹701, और ₹501 रुपए की सम्मान निधि प्रदान की गई।
विजेताओं की घोषणा श्री गोकुल सोनी द्वारा की गई।
पुरस्कार के लिफाफे वितरित करने के पश्चात अध्यक्षता कर रहे श्री पंकज सुबीर ने कमलेश्वर से संबंधित कई रोचक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वे एक सफल बहुआयामी रचनाकार थे। श्री आलोक त्यागी ने कहा कि श्री कमलेश्वर संग्रहालय की स्थापना के प्रथम दिवस से ही राजुकर जी से जुड़े रहे और मार्गदर्शन देते रहे। ममता कमलेश्वर (ममता त्यागी) ने इस अवसर पर अपने पिता कमलेश्वर जी को याद करते हुए कहा कि बचपन में मैं उनसे सलाह लेकर काम करती थी। बाद में प्रत्येक सुबह आठ बजे पिता का फोन आता था और वे मुझे दिन भर के कार्यक्रम बताते हुए सलाह लेते थे।
श्री सुरेश पटवा ने भी कुछ अंतरंग प्रसंगों को सुनाया। अंत में आभार संग्रहालय के अध्यक्ष श्री रामराव वामनकर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों श्रोताओं ने उत्साह से भाग लिया।



