नजरअंदाज मत कीजिए डिजिटल एडिक्शन, किसी भी नशे की लत से है ज्यादा खतरनाक
संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सरकार ने चेताया है। सरकार इस पर क्या नीति बनाएगी बात की बात है, लेकिन सच यह है कि ‘डिजिटल एडिक्शन’ भारत को बीमार कर रहा है। इसके कारण देश में मेटाबॉलिक बीमारी, मानसिक तनाव, मोटापा बहुत तेजी से पांव पसार रहा है। लाइफ केयर अस्पताल के सीएमडी डा. जीपी पाठक कहते हैं कि ‘डिजिटल एडिक्शन’ सड़क पर होने वाली तमाम दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।मनोवैज्ञानिक डा. एके सिंह कहते हैं कि यह आने वाली समय की सबसे गंभीर समस्या बन सकता है। बच्चों के मन मस्तिष्क पर इसका सबसे खराब असर पड़ रहा है और यह लोगों की तनाव सहने की क्षमता को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है। इसके कारण लोगों में चिड़चिड़ा पन का बहुत तेजी से विस्तार हो रहा है। इसका नशा किसी भी ड्रग आदि के नशे से कम खतरनाक नहीं है। न्यूट्रीशन एक्सपर्ट शेफाली कहती हैं कि डिजिटल एडिक्शन के कारण लोगों की खान-पान की शैली पर बुरा असर पड़ रहा है।कानून एवं विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि आर्थिक सर्वे में इसका उल्लेख किया गया है। यह बहुत गंभीर समस्या बन रहा है। उनके मुताबिक लोगबाग मोबाइल फोन आदि की लत किसी नशे से भी अधिक खतरनाक स्वरुप में सामने आ रही है। इस तरह की समस्या भारत जैसे देश में तेजी से बढ़ रही है। जबकि यूरोप, अमेरिका जैसे विकसित देशों में स्थिति इस तरह से खराब नहीं है।क्या है डिजिटल एडिक्शन?
दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल की शिक्षिका रश्मि वर्मा का कहना है कि मोबाइल फोन की लत बच्चों को खराब स्थिति में पहुंचा रही है। स्कूलों में बच्चों को मोबाइल फोन लेकर आने पर पूरी पाबंदी लगाई गई है, लेकिन इसके बाद भी बच्चों को अभिभावक मोबाइल फोन दे देते हैं। रश्मि वर्मा कहती हैं कि 2015-16 के बाद से मोबाइल फोन, सोशल मीडिया का प्रयोग तेजी से बढ़ा। कोविड-19 के बाद इसी विधा से पढ़ाई लिखाई होने के कारण बच्चों को इसने बहुत तेजी से अपनी चपेट में ले लिया। तमाम अभिभावकों ने इस दौरान बायजू, आकाश समेत शिक्षा के तमाम डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया। इसके कारण अब बच्चों को इससे दूर रख पाना मुश्किल हो रहा है।
इस बारे में रंजना का कहना है कि बच्चों में मोबाइल फोन, डिजिटल एडिक्शन का बढ़ावा स्कूलों, शिक्षा संस्थानों आदि के कारण अधिक बढ़ रहा है। स्कूल में शिक्षकों ने व्हाट्सअप एप पर जब से शिक्षा सामग्री भेजनी शुरू की है, तब से चाहकर भी बच्चों से स्मार्ट फोन को दूर रख पाना मुश्किल हो रहा है। सोचिए एआई का प्रयोग और बढ़ा तो क्या होगा?
राजेश चौधरी आईटी कंपनी माइंड ट्री में हैं। अमर उजाला से बातचीत में कहते हैं कि डिजिटल मशीन, इसका प्रयोग और इस पर निर्भरता मनुष्य को बीमार बनाने की तरफ बढ़ रही है। चौधरी के मुताबिक अभी तो एआई की पूरी तरह से इंट्री नहीं हुई है। अभी एआई नए अवतार में आने के लिए आगे बढ़ रहा है। राजेश चौधरी कहते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफार्म के प्रयोग के लिए कोई नियम-मर्यादा नहीं है। लोगों में भी अनुशासन नहीं है। यह आने वाले समय में बहुत खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।



