आचार्य शंकर न्यास द्वारा 87 वीं शंकर व्याख्यानमाला आज
स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती (वाराणसी ) नैष्कर्म्य-सिद्धि: विषय पर देंगे व्याख्यान


भोपाल। उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धान्त को साधारण जनमानस तक पहुँचाने वाले आचार्य शंकर की परम्परा को अक्षुण्ण रखने के लिये आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा पिछले 6 वर्षों से प्रतिमाह निरंतर शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाता है। जनवरी माह में न्यास द्वारा आज 87 वीं व्याख्यानमाला का आयोजन प्रातः 9 बजे से ऑनलाइन किया जाएगा, जिसमें स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती, आचार्य श्री श्रीनिगमानन्द विद्यानिकेतन, (वाराणसी) ‘नैष्कर्म्य-सिद्धि:‘ विषय पर व्याख्यान देंगे, जिसे श्रोता एकात्म धाम के यूट्यूब लाइव से ऑनलाइन जुड़कर व्याख्यान को सुन सकते है।
स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती प्रख्यात वेदान्ताचार्य एवं संन्यासी हैं। आपने वर्ष 1978 में परमपूज्य स्वामी अखण्डानंद सरस्वती जी से संन्यास दीक्षा ग्रहण की। संस्कृत एवं वेदान्त के क्षेत्र में आपकी गहन विद्वत्ता सर्वविदित है। आपने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से वर्ष 1985 में वेदान्त विषय में शास्त्री एवं आचार्य की उपाधि प्राप्त की। आप बंगीय संस्कृत शिक्षा परिषद, कोलकत्ता द्वारा व्याकरण तीर्थ की उपाधि से अलंकृत हैं।
आपने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से वर्ष 1989 में “नैष्कर्म्य-सिद्धि” विषय पर पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। शास्त्र, व्याकरण एवं अद्वैत वेदान्त पर आपकी सुस्पष्ट, तार्किक एवं अनुभूति-प्रधान व्याख्याएँ साधकों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रही हैं। स्वामी जी का सम्पूर्ण जीवन शास्त्र-अध्ययन, अध्यापन और आत्मबोध के प्रसार को समर्पित है।
ज्ञात हो कि प्रति माह शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन नियमित किया जाता है, जिसमें अद्वैत परम्परा के ही एक संन्यासी द्वारा गूढ वैदान्तिक विषय पर प्रकाश डाला जाता है। व्याख्यानमाला ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यमों से आयोजित की जाती है, जिसमें वेदांतिक रुचि रखने वाले प्रदेश व देश के जिज्ञासु श्रोता सम्मिलित होते हैं। न्यास द्वारा पिछले 6 वर्षों से अधिक समय से निरंतर विविध विषयों पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से देशभर के लाखों श्रोता जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त न्यास द्वारा ओंकारेश्वर में एकात्मता का वैश्विक केंद्र – ‘एकात्म धाम’ विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य जी की ‘एकात्मता की प्रतिमा’ मान्धाता पर्वत पर स्थापित की गई। इससे अतिरिक्त अद्वैत लोक – संग्रहालय तथा आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की भी स्थापना की जा रही है।


