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शहर तय करेंगे भारत की ग्रोथ, भोपाल को चाहिए विशेष पुनर्निर्माण पैकेज: क्रेडाई भोपाल को दफ्तरों का नहीं, नवाचार और ज्ञान का शहर बनाना होगा केंद्रीय बजट से शहरी विकास, रियल एस्टेट और राजधानी भोपाल के लिए अपेक्षाएँ
आर्थिक सर्वेक्षण ने साफ संकेत दिया है कि भारत की ग्रोथ का अगला अध्याय ‘शहरों की कार्यक्षमता’ से लिखा जाएगा और इसके लिए बजट को अब कवरेज से आगे बढ़कर क्वालिटी, रिडेवलपमेंट और गवर्नेंस क्षमता पर फोकस करना होगा। आने वाले वर्षों में शहरों पर आबादी, रोजगार और सेवाओं का दबाव और बढ़ेगा। अब बजट का फोकस शहरों की कार्यक्षमता, आवासीय आपूर्ति, पुनर्विकास और नगरीय वित्तीय क्षमता पर होना चाहिए।
आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेत:
•घर खरीदना अब तेजी से औपचारिक वित्त से जुड़ रहा है—व्यक्तिगत हाउसिंग लोन का आकार मार्च, दो हजार पच्चीस तक रुपये सैंतीस लाख करोड़ से अधिक बताया गया है।
•किफायती आवास में सरकार का काम दिखता है—पीएमएवाई शहरी के तहत रुपये एक सौ बाईस दशमलव शून्य छह लाख घर स्वीकृत बताए गए हैं।
•शहरी ढांचे में अब “सिर्फ कवरेज” नहीं, “सिस्टम की गुणवत्ता” की जरूरत है; सर्वेक्षण में अगले पंद्रह वर्षों के लिए लगभग आठ सौ चालीस अरब डॉलर के शहरी निवेश की जरूरत का संकेत है।
बजट से राजधानी भोपाल की सीधी अपेक्षाएँ:
पहली और सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यह है कि शहरी विकास के लिए घोषित “अर्बन चैलेंज फंड” को इस बजट में व्यावहारिक और परिणाम देने वाले रूप में लागू किया जाए। क्रेडाई भोपाल की मांग है कि भोपाल जैसी राजधानी के लिए इसके अंतर्गत एक विशेष “कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज” की स्पष्ट व्यवस्था बने। राजधानी होने के कारण भोपाल पर प्रशासनिक और संस्थागत दबाव अधिक है, जबकि वर्षों से यहां का पुनर्विकास लंबित रहा है। ऐसे में भोपाल के लिए अलग प्राथमिकता पूरी तरह उचित है।
दूसरी अपेक्षा यह है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित नॉलेज एंड एआई सिटी को केंद्रीय स्तर पर आवश्यक संसाधनों और समर्थन के साथ देश के एआई मिशन से जोड़ा जाए। भौगोलिक रूप से देश के केंद्र में स्थित और खनिज संपदा से समृद्ध राज्य की राजधानी भोपाल को लॉजिस्टिक्स और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए।
भोपाल के लिए विशेष “कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज” क्यों?
भोपाल देश के मध्य स्थित एक ख़ूबसूरत राजधानी है, पर उन्नीस सौ चौरासी की औद्योगिक त्रासदी के बाद यह शहर लंबे समय तक दबाव, ठहराव और अवसर-हानि से गुजरा है। आज भोपाल को केवल नई परियोजनाओं से नहीं, बल्कि एक “विशेष पुनर्निर्माण पैकेज” से आगे बढ़ाया जा सकता है जिसमें रिडेवलपमेंट, ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक भूमि का बेहतर उपयोग, और नगर निकाय की आय बढ़ाने के उपाय साथ-साथ हों। “अर्बन चैलेंज फंड” के भीतर भोपाल के लिए अलग विशेष विंडो बनाना इसी सोच का व्यावहारिक कदम होगा।
“भारत की ग्रोथ का अगला इंजन शहर हैं; और भोपाल जैसी राजधानी को अब ‘ठहराव’ नहीं, ‘रिडेवलपमेंट और नई अर्थव्यवस्था’ का मौका देने वाला बजट चाहिए। भोपाल के संदर्भ में यह केवल विकास की बात नहीं है यह राजधानी की विश्वसनीयता, निवेश आकर्षण, रोजगार सृजन और नागरिक जीवन-गुणवत्ता का प्रश्न है। ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के तहत हम चाहते हैं कि नया बजट भोपाल को “दफ्तरों का शहर” नहीं, बल्कि “नवाचार, ज्ञान, और सुव्यवस्थित शहरी विकास” का मॉडल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए।”



