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चार-चार बच्चों की माएं प्रेमियों संग भाग रही, सरकार कोई उपाय करे’, विधानसभा में बोले नरेंद्र बुडानिया

विधानसभा में कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया ने उद्घाटन कार्यक्रमों में विधायकों की अनदेखी का आरोप लगाया। साथ ही प्रदेश में बढ़ती सामाजिक समस्याओं, खासकर महिलाओं के प्रेमियों संग भागने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए सरकार और समाज से समाधान खोजने की अपील की।

जयपुर में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया ने सरकार पर तीखे तंज कसते हुए कई मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी उद्घाटन कार्यक्रमों में निर्वाचित विधायकों की अनदेखी की जा रही है और चुनाव हार चुके भाजपा उम्मीदवारों से उद्घाटन कराए जा रहे हैं, जो जनप्रतिनिधियों की गरिमा के खिलाफ है।

उद्घाटन कार्यक्रमों को लेकर उठाए सवाल
बुडानिया ने तारानगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में उनके क्षेत्र में अस्पताल का शिलान्यास हो चुका था। उन्हें उम्मीद थी कि स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन करेंगे, लेकिन वहां जल संसाधन मंत्री उद्घाटन के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार अपने दो साल पूरे होने का उत्सव मना रही है, जबकि उद्घाटन पट्टिकाओं पर स्थानीय विधायक का नाम नहीं है और हारे हुए उम्मीदवारों का नाम दर्ज है।

कैंची लेकर घूम रहे हैं हारे हुए उम्मीदवार’
कांग्रेस विधायक ने कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव हार चुके उम्मीदवार उद्घाटन के लिए ‘कैंची लेकर घूम रहे हैं’। उन्होंने कहा कि एक ओर विधायक विधानसभा में जनता की आवाज उठा रहे हैं और दूसरी ओर उद्घाटन ऐसे लोग कर रहे हैं, जिन्हें जनता ने नकार दिया है। बुडानिया के अनुसार यह परंपरा लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायकों की गरिमा के खिलाफ है।

सामाजिक मुद्दों पर भी जताई गहरी चिंता
इसी बहस के दौरान नरेंद्र बुडानिया ने प्रदेश में बढ़ती सामाजिक समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि लड़कियों के घर से भागने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे माता-पिता चिंतित हैं। उनका दावा था कि हजारों लड़कियां घर छोड़ रही हैं और कई मामलों में चार-चार बच्चों की माताएं भी प्रेमियों के साथ भाग रही हैं।

पुलिस कार्रवाई और पारिवारिक पीड़ा का किया जिक्र
बुडानिया ने कहा कि कई मामलों में पुलिस द्वारा बरामद की गई लड़कियां अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती हैं। उन्होंने इसे समाज के लिए बेहद दुखद स्थिति बताया और कहा कि जब कोई बेटी अपने मां-बाप को पहचानने से मना कर दे, तो इससे बड़ा कष्ट कुछ नहीं हो सकता।

सभी दलों से समाधान तलाशने की अपील
उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल किसी एक दल या सरकार की नहीं है, बल्कि सभी राजनीतिक दलों और समाज को मिलकर इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। केंद्र सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं दायरों में रहते हुए प्रभावी समाधान तलाशना जरूरी है।

नरेंद्र बुडानिया ने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई मामलों में बेटी के वापस आने के बाद पिता गहरे सदमे में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। उन्होंने इसे पूरे समाज के लिए चेतावनी बताया और इस विषय पर संवेदनशील तथा गंभीर चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। 

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