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45 साल की सबसे बड़ी गिरावट का असर, सीएमई ने बढ़ाया सोने-चांदी का मार्जिन

सीएमई ग्रुप ने सोने-चांदी की भारी गिरावट के बाद मार्जिन बढ़ा दिया है। अब गोल्ड का नॉन-हाइटेंड रिस्क मार्जिन 6 फीसदी से 8 फीसदी और सिल्वर का 11 फीसदी से 15 फीसदी हो गया

कीमती धातुओं में 45 साल की सबसे बड़ी गिरावट के बाद शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (सीएमई) ग्रुप ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को जारी बयान में एक्सचेंज ने कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाने की घोषणा की है। यह बदलाव सोमवार की क्लोजिंग से लागू होगा।

अब इतना हो जाएगा सोने और चांदी पर मार्जिन

गोल्ड के लिए नॉन-हाइटेंड रिस्क प्रोफाइल का मार्जिन अब अनुबंध के मूल्य का 8 फीसदी होगा, जो पहले 6 फीसदी पर था। हाइटेंड रिस्क प्रोफाइल में यह 6.6 फीसदी से बढ़कर 8.8 फीसदी हो जाएगा। इसी तरह सिल्वर में नॉन-हाइटेंड रिस्क का मार्जिन 11 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी और हाइटेंड रिस्क का 12.1 फीसदी से 16.5 फीसदी हो जाएगा। प्लेटिनम और पैलेडियम फ्यूचर्स पर भी मार्जिन बढ़ाया जाएगा।

रिकॉर्ड गिरावट के चलते बढ़ाया गया मार्जिन

सीएमई ने कहा कि यह फैसला बाजार की वोलेटिलिटी की सामान्य समीक्षा के बाद लिया गया है, ताकि पर्याप्त कोलेटरल (सुरक्षा राशि) सुनिश्चित हो सके। हाल ही में सोना और चांदी में जबरदस्त तेजी आई थी, लेकिन पिछले दिनों में रिकॉर्ड गिरावट देखी गई। ट्रंप के फेड चेयर नॉमिनेशन और स्पेकुलेटिव बिकवाली से यह क्रैश हुआ था।

शुक्रवार को आई 45 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट

वैश्विक बाजार में शुक्रवार को स्पॉट सिल्वर 28 फीसदी गिरकर 83.45 डॉलर प्रति औंस पर आया, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 31.4 फीसदी टूटकर 78.53 डॉलर पर बंद हुए. यह 1980 के बाद सिल्वर का सबसे बुरा दिन था। इसी तरह स्पॉट गोल्ड 9 फीसदी नीचे 4,895.22 डॉलर पर और गोल्ड फ्यूचर्स 11.4 फीसदी गिरकर 4,745.10 डॉलर पर आए। 2025 में सोना 66 फीसदी और चांदी 135 फीसदी ऊपर गई थी, लेकिन अब प्रॉफिट बुकिंग और मार्जिन कॉल्स से जबरदस्त बिकवाली हुई।

मार्जिन बढ़ने से प्रभावित होंगे छोटे ट्रेडर

मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि फ्यूचर्स ट्रेड करने वाले निवेशकों को अब ज्यादा पैसे जमा करने होंगे। अगर कोई ट्रेडर पहले कम मार्जिन पर पोजीशन रख रहा था, तो अब उसे अतिरिक्त कोलेटरल डालना पड़ेगा, वरना पोजीशन बंद हो सकती है। इससे छोटे निवेशक और रिटेल ट्रेडर्स ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास इतना अतिरिक्त कैश नहीं होता। बड़े संस्थागत ट्रेडर्स इसे आसानी से हैंडल कर लेंगे।

बढ़ सकता है सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव

एक्सचेंज अक्सर जब कोई कमोडिटी बहुत ऊपर जाती है, नीचे गिरती है या बहुत वोलेटाइल होती है, तब मार्जिन बढ़ाता है। इस बार की गिरावट इतनी तेज थी कि सीएमई को रिस्क मैनेजमेंट के लिए यह कदम उठाना पड़ा। इससे आगे बाजार में और बिकवाली का दबाव आ सकता है, लेकिन साथ ही यह बाजार को ज्यादा स्थिर बनाने में मदद करेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ पाठकों को सूचित करने के लिए है। बाजार में निवेश करने के अपने जोखिम होते हैं। अगर आप निवेशक के तौर पर बाजार में पैसे लगाना चाहते हैं तो इसके लिए एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। अमर उजाला/बोनस की ओर से कभी भी निवेश से जुड़ी सलाह नहीं दी जाती है।

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