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विज्ञान संचार सम्मानों से नवाज़े जाएंगे देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं विज्ञान कथाकार

डॉ. मनोज पटैरिया को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान संचारक सम्मान -    डॉ. मनीष मोहन गोरे को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान कथा सम्मान’, -    श्री समीर गांगुली को ‘सर सी.वी.रामन बाल विज्ञान कथा सम्मान’ -    डॉ. प्रदीप मिश्र को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान कविता सम्मान’

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के सर सी.वी. रामन विज्ञान संचार केंद्र द्वारा सोमवार को प्रतिवर्ष दिए जाने वाले विज्ञान संचार सम्मानों की घोषणा की गई है। चार श्रेणी में प्रदान किए जाने वाले सम्मानों में डॉ. मनोज पटैरिया को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान संचारक सम्मान’, डॉ. मनीष मोहन गोरे को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान कथा सम्मान’, श्री समीर गांगुली को ‘सर सी.वी.रामन बाल विज्ञान कथा सम्मान’ और डॉ. प्रदीप मिश्र को ‘सर सी.वी.रामन विज्ञान कविता सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। 6 फरवरी को रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में विज्ञान पर्व के तहत आयोजन में सम्मानित किया जाएगा।
सम्मानित वैज्ञानिक रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और सम्मान राशि 21,000 हजार रुपये प्रदान की जायेगी।
उल्लेखनीय है कि डॉ. मनोज पटैरिया देश के ख्यात वैज्ञानिक और विज्ञान संचारक हैं उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा दूरदर्शन में अपनी सेवाएं देते हुए विज्ञान के जन-जन तक संचार हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर देश भर में 500 जिलों में विज्ञान प्रसार के लिए प्रशिक्षित कार्यक्रम आयोजित किए तथा शैक्षणिक कार्यक्रम तैयार किए। इस अमूल्य योगदान के लिए उन्हें देश तथा देशान्तरों में सम्मानित किया गया है।
डॉ. मनीष मोहन गोरे महत्वपूर्ण विज्ञान कथाकार और वैज्ञानिक हैं। गत वर्ष प्रकाशित उनका विज्ञान कथा संग्रह ‘तीन सौ पच्चीस साल का आदमी’ पर्याप्त चर्चित हुआ है। इसके अतिरिक्त विज्ञान कथा का सफर, विज्ञान कथा संकलन, रोमांचक विज्ञान कथा प्रकाशित कृतियां हैं। वे विज्ञान मासिक पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ के संपादक हैं। विज्ञान गल्प के साथ विगत तीन दशकों से वे विज्ञान लेखन और विज्ञान संचार कर रहे हैं। बाल विज्ञान कथा सम्मान से सम्मानित समीर गांगुली ने 22 से अधिक बाल उपयोगी विज्ञान कृतियों की रचना की है। वे 1975 से लगातार प्रकाशित और प्रशंसित हैं।
डॉ. प्रदीप मिश्र, परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक अधिकारी ‘एफ’ हैं और साथ ही हिन्दी साहित्य में उनका उल्लेखनीय नाम हैं। उनका एक वैज्ञानिक उपन्यास ‘अंतरिक्ष नगर’ काफी चर्चित हुआ है। इसके अतिरिक्त फिर कभी, उम्मीद, मुट्ठी में किस्मत, घूप की अलगनी, तर्क में सुबह आदि कृतियाँ प्रकाशित और सम्मानित हुई हैं।
इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि सी.वी.रामन विज्ञान संचार केंद्र विज्ञान का व्यापक प्रसार-प्रसार और संचार करता रहा है। विज्ञान का सरलीकरण भी इस केन्द्र का ध्येय रहा है जिसमें जन सामान्य तक पहुँचकर उन्हें जागरुक करना, अंधविश्वास के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना, विज्ञान पुस्तकों का प्रकाशन करना जैसे उपक्रम शामिल हैं। मैं पुरस्कार के लिए चयनित इन सभी वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं, उन्होंने विज्ञान संचार के लिए देश और अन्य देशों में महत्वपूर्ण काम किया है।

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