स्वास्थ्य सेवाओं की क्षेत्रीय संचालक ने सीएमएचओ भोपाल से 24 घंटे में तलब किए दस्तावेज
फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट मामले में डॉ. रितेश रावत व डॉ. अभिषेक सेन पर जल्द होगी कार्रवाई एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष की शिकायत पर सख्त कार्यवाही की तैयारी
भोपाल :- स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। स्वास्थ्य सेवाओं की क्षेत्रीय संचालक द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), भोपाल से एन.आर.आई. इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, भोपाल एवं पेरेन्टल अरनव अस्पताल के पंजीयन से संबंधित समस्त दस्तावेज 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह कार्रवाई शिकायतकर्ता एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में परमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों द्वारा फर्जी एवं कूटरचित भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर शासन-प्रशासन को गुमराह किया गया, जिसके आधार पर संस्थानों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. रितेश रावत एवं डॉ. अभिषेक सेन की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने के मामले में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध शीघ्र विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है। एनएसयूआई ने मांग की कि जांच के बाद निलंबन एवं एफआईआर दर्ज की जाएं
स्वास्थ्य सेवाओं की क्षेत्रीय संचालक ने सीएमएचओ भोपाल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एन.आर.आई. इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एवं उससे संबद्ध पेरेन्टल अरनव अस्पताल के रजिस्ट्रेशन, मान्यता, निरीक्षण, भौतिक सत्यापन एवं अन्य संबंधित सभी अभिलेख तय समय-सीमा में उपलब्ध कराए जाएं, जिससे निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जा सके।
रवि परमार ने कहा कि
> “स्वास्थ्य एवं नर्सिंग शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में फर्जी निरीक्षण और कूटरचित दस्तावेज न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि जनता और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। यदि अधिकारी स्वयं नियमों को तोड़ेंगे, तो व्यवस्था पर से विश्वास उठेगा। दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
परमार ने कहा कि सीएमएचओ डॉ मनीष शर्मा की मिली भगत से ही राजधानी भोपाल में निरंतर फर्जी अस्पताल खुले आम खुलते जा रहें हैं दोनों दोषी अधिकारियों को इतने लंबे समय से संरक्षण देने से स्पष्ट होता हैं कि फर्जी एवं कूटरचित निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने में कहीं ना कहीं सीएमएचओ की भी भूमिका हैं जब तक दोषियों को दंड नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।



