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क्या है नया एआई टूल जिसने आईटी सेक्टर में मचाई खलबली?: एक दिन में लाखों करोड़ डूबे, जानें क्या हुआ

मंगलवार-बुधवार के बीच ऐसा क्या हुआ कि दुनियाभर में शेयर बाजारों में आईटी सेक्टर भारी नुकसान में रहे? जिस एआई टूल की बात हो रही है, वह क्या है? इसमें ऐसा क्या खास है? इस एआई टूल का क्या असर हो सकता हैभारत में शेयर बाजार बुधवार (4 फरवरी) को सकारात्मक स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, आईटी सेक्टर के अधिकतर शेयर्स निचले स्तर पर बंद हुए। जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, उनमें इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस), एचसीएल और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां शामिल रहीं। इन कंपनियों के शेयर में करीब पांच फीसदी से 10 फीसदी तक की गिरावट आई। यूं तो अमेरिका से व्यापार समझौते के बाद सेवा क्षेत्र को छूट मिलने की वजह से मंगलवार को इनमें से अधिकतर कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया, लेकिन बुधवार को सूरत बदली नजर आई और शेयर बाजार में टेक सेक्टर के स्टॉक गिरते नजर आए। यह स्थिति सिर्फ भारतीय शेयर बाजार में ही नहीं रही, बल्कि अमेरिकी शेयर बाजारों के शेयर्स सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। इस गिरावट की वजह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल को बताया जा रहा है।

आइये जानते हैं कि मंगलवार-बुधवार के बीच ऐसा क्या हुआ कि दुनियाभर में शेयर बाजारों में आईटी सेक्टर भारी नुकसान में रहे? जिस एआई टूल की बात हो रही है, वह क्या है? इसमें ऐसा क्या खास है? इस एआई टूल का क्या असर हो सकता है? 

क्या है वह एआई टूल, जिसने आईटी सेक्टर में मचाई खलबली?

अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) जो कि अब तक ओपनएआई के चैटजीपीटी और गूगल के जेमिनी के सामने चर्चा तक में नहीं थी, वह लंबे समय से अपने- क्लॉड चैटबॉट के जरिए एआई पर काम कर रहा था। इसी साल जनवरी में कंपनी ने अपना एक कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) टूल- क्लॉड को-वर्क लॉन्च किया, जो कि क्लॉड चैटबॉट के साथ जुड़ा है। यह एक एजेंटिक एआई असिस्टेंट है, जो कि मुख्यतः गैर-तकनीकी पेशेवरों के लिए डिजाइन किया गया है। यह एआई असिस्टेंट आम लोगों के लिए फाइलों को पढ़ने, दस्तावेज ड्राफ्ट करने और कई चरणों वाले जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम है।

क्लॉड को-वर्क, क्लॉड चैटबॉट के साथ जुड़कर इसे कुछ खासियतें दे देता है। इनमें सबसे अहम खासियत है प्लग-इन्स का जोड़ने की सुविधा। एंथ्रोपिक ने 30 जनवरी, 2026 (शुक्रवार) को इसके लिए 11 ओपन-सोर्स प्लग-इन्स जारी किए। सीधे शब्दों में समझें तो एंथ्रोपिक ने अपने एआई में बदलाव के लिए यूजर्स को ही खुली छूट दे दी। वे एआई में अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ नए कौशल, अहम जानकारियां, कमांड्स या सब-एजेंट्स जोड़ सकते हैं, जिससे क्लॉड आपकी भूमिका, टीम या कंपनी के लिए विशेषज्ञ की तरह काम करता है। इसे एक उदाहरण से समझें…

  • यह प्लग-इन खास तौर पर कानूनी कामों के लिए है। इससे एआई कॉन्ट्रैक्ट्स की समीक्षा, नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट की जांच, और कानूनी ब्रीफिंग तैयार करने जैसे काम मिनटों में कर सकता है।
  • क्लॉड को-वर्क 10 और प्लग-इन्स के जरिए लोग सेल्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, डाटा विश्लेषण, कस्टमर सर्विस और जीव विज्ञान अनुसंधान भी कर सकते हैं।
  • एजेंटिक क्षमताओं की वजह से यह सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि काम की योजना बना सकता है, उन्हें प्रकाशित और उनकी समीक्षा भी कर सकता है।

यह चैटजीपीटी और बाकी एआई टूल्स से अलग कैसे?

एंथ्रोपिक का यह टूल एआई जगत में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसे विश्लेषकों ने SaaSpocalypse का नाम दिया है। जहां जेनेरेटिव टूल (जैसे- चैटजीपीटी) इंसानों की तरफ से प्रॉम्प्ट (निर्देश) के आधार पर काम करते हैं और इन्हें बार-बार निर्देश दिए जाने की जरूरत पड़ती है, वहीं एजेंटिक एआई को एक तय लक्ष्य दिया जाता है और यह अपनी स्वतंत्र प्रकृति के जरिए बिना हर कदम पर निर्देश लिए, उस लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर देता है। सीधे शब्दों में समझें तो यह एआई अपने हिसाब से कृत्रिम बुद्धिमता का इस्तेमाल करता है, खुद योजना तय करता है, उसका विश्लेषण करता है और लक्ष्य तक पहुंचता है।

क्या-क्या कर सकता है क्लॉड को-वर्क?

वर्कफ्लो पर नियंत्रण: दुनियाभर की एआई कंपनियां सिर्फ मॉडल बेचती हैं, जिन पर दूसरी कंपनियां अपने हिसाब से सॉफ्टवेयर विकसित करती हैं। लेकिन एंथ्रोपिक अब सीधे सॉल्यूशन दे रहा है। यानी उसका एआई टूल इंस्ट्रक्शन पर कंपनी के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर बना रहा है। इसके चलते यह उन सॉफ्टवेयर कंपनियों और इसमें काम करने वाले ऐसे लोगों के मुकाबले में खड़ा हो गया है, जो एआई मॉडल का इस्तेमाल कर सॉफ्टवेयर बनाने का काम करते हैं।

वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टैनली के एक विश्लेषक के मुताबिक, क्लॉड वर्कफ्लो ने उन सॉफ्टवेयर कंपनियों और इसमें काम करने वाले ऐसे लोगों के मुकाबले में खड़ा हो गया है, जो एआई मॉडल का इस्तेमाल कर सॉफ्टवेयर बनाने का काम करते हैं।

सॉफ्टवेयर को बदलने की क्षमता: यह टूल इसे इस्तेमाल करने वाले की जरूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर सकता है या बदल भी सकता है। यानी जो कंपनियां अब तक सॉफ्टवेयर को सुधारने या इसकी कोडिंग बदलने का काम करती थीं, यह एआई टूल उन कंपनियों की जरूरत को भी खत्म कर सकता है, जैसे- सेल्सफोर्स (Salesforce) या सर्विसनाउ (ServiceNow) जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स।

दुनियाभर-भारत में क्लॉड को-वर्क की वजह से हलचल क्यों?
सैप्सोकैलिप्स (SaaSpocalypse) शब्द बाजार विश्लेषक जेफरीज की तरफ से दिया गया है, जो सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) कंपनियों के शेयरों में आई भारी गिरावट और उनके अस्तित्व पर मंडराते खतरे को दर्शाता है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब निवेशकों को लगा कि आधुनिक एआई टूल्स अब सॉफ्टवेयर कंपनियों की मदद करने के बजाय सीधे उन्हें रिप्लेस करने लगे हैं।

बाजार में मची खलबली का सबसे बड़ा कारण एंथ्रोपिक का लीगल ऑटोमेशन प्लग-इन रहा। यह प्लग-इन जटिल कानूनी कार्यों को मिनटों में कर सकता है। इससे निवेशकों में यह डर बैठ गया कि पारंपरिक कानूनी और प्रशासनिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की मांग खत्म हो जाएगी।

क्लॉड के नए एजेंट अब सीधे कार्यों को एक्जीक्यूट यानी अंतिम पड़ाव तक पहुंचा सकते हैं, जिससे पारंपरिक इंटरफेस की आवश्यकता कम हो सकती है। यह एआई टूल्स डाटा प्रोसेसिंग और ग्राहक सहायता जैसे उन कार्यों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिसके जरिए भारतीय आईटी कंपनियां और वैश्विक सॉफ्टवेयर फर्म्स राजस्व कमाती रही हैं।

जेपी मॉर्गन के विश्लेषक टोबी ऑग के मुताबिक, नए एआई टूल की वजह से शेयर बाजार में आईटी शेयरों में जो गिरावट आई, वह ऐसी ही है जैसे उसे बिना परीक्षण के पूरा मौका मिले ही सजा सुना दी गई है।

शेयर बाजार पर कैसा असर पड़ा?

अमेरिका में सिर्फ एक कारोबारी सत्र में सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और वित्तीय सेवा शेयरों की वैल्यू से लगभग 285 अरब से 300 डॉलर साफ हो गए। इसके अलावा प्रमुख कंपनियों को नुकसान हुआ है। इनमें थॉमसन रॉयटर्स के शेयरों में 15%, लीगलजूम में 20% और सेल्सफोर्स में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई।

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, ट्रंप के टैरिफ एलान के बाद शेयर बाजार में जो गिरावट आई थी, यह उसके बाद से सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट थी। यह असर बुधवार को भारतीय आईटी क्षेत्र में भी देखने को मिला। शेयर बाजार से दिग्गज कंपनियों जैसे- इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयरों में भी 5% से 8% तक की गिरावट आई।

यूरोप और ब्रिटेन के बाजारों में भी जबरदस्त गिरावट देखी गई। ब्रिटेन के लोकप्रिय पब्लिशिंग ग्रुप-पीयरसन के शेयर लगभग आठ फीसदी, सेज (Sage) सॉफ्टवेयर कंपनी के 10% और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप के शेयरों में भी 12% से अधिक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा एम्सटर्डम स्थित डच सॉफ्टवेयर कंपनी वोल्टर्स क्लूवर  के शेयरों में 13% की गिरावट आई।

क्या खतरा बन गया है को-वर्क, अब आगे क्या?

1. बाजार में रह सकती है अस्थिरता
विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में मची खलबली जल्द शांत होने वाली नहीं है। अस्थिरता फिलहाल बनी रहेगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वर्तमान गिरावट केवल भावनाओं पर आधारित प्रतिक्रिया हो सकती है और बाजार छोटी अवध में एआई के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर देख रहा है।

2. रोजगार और कार्यबल पर प्रभाव
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने चेतावनी दी है कि एआई अब उन ‘व्हाइट-कॉलर’ नौकरियों को प्रभावित कर रहा है जिन्हें सुरक्षित माना जाता था। पांच वर्षों के अंदर तकनीक, वित्त और कानून जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नौकरियां कम हो सकती हैं।

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