

दिल्ली में हार्ट अटैक और दिल की बीमारियों से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। साल 2005 से 2024 के बीच कुल 3,29,857 लोगों की मौत दिल की वजहों से हुई। दिल्ली सरकार के डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, निमोनिया भी मौतों का बड़ा कारण बनता जा रहा है।
बच्चे हो रहे सबसे अधिक शिकार
निमोनिया से होने वाली मौतों में 2021 में सबसे ज्यादा 6,751 मामले सामने आए। बच्चों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, जबकि 65 साल से ऊपर बुजुर्गों में 11,393 मौतें हुईं। अस्पतालों में दर्ज मौतों का प्रतिशत 69.10 से 99.90 फीसदी के बीच रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में बढ़ती उम्र और प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़ों की बीमारियों से मौत का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
निमोनिया से होने वाली मौतों में 2021 में सबसे ज्यादा 6,751 मामले सामने आए। बच्चों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, जबकि 65 साल से ऊपर बुजुर्गों में 11,393 मौतें हुईं। अस्पतालों में दर्ज मौतों का प्रतिशत 69.10 से 99.90 फीसदी के बीच रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में बढ़ती उम्र और प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़ों की बीमारियों से मौत का खतरा लगातार बढ़ रहा है।


