एजुकेशनखबरमध्य प्रदेश

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य समापन

हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास लक्ष्यों पर हुआ गहन मंथन

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में 6 एवं 7 फरवरी 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” के पांचवें संस्करण का भव्य एवं सफल समापन हुआ। सम्मेलन की थीम “इनोवेशन फॉर इम्पैक्ट: एडवांसिंग ग्रीन टेक्नोलॉजीज़ एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs)” है, जिसके अंतर्गत हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों, नवाचार तथा शोध आधारित समाधानों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ मिथिलेश तिवारी, सहायक आचार्य महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ओम प्रकाश पाथी, अकाउंट आफिसर जवाहरलाल नेहरू कैंसर हास्पिटल भोपाल, डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कुलाधिपति, स्कोप ग्लोबल स्किल विश्वविद्यालय, भोपाल; डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, प्रो-चांसलर, आरएनटीयू; प्रो. रवि प्रकाश दुबे, कुलगुरु, आरएनटीयू,और डॉ नितिन वत्स, डायरेक्टर आईक्यूएसी, डॉ बसंत सिंह, प्रो-वाइस चांसलर सीवीआरयू वैशाली, बिहार, डॉ गौरव शुक्ला,प्रो-वाइस चांसलर आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग झारखंड,
डॉ रचना चतुर्वेदी, संयोजक शोध शिखर की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शोध और नवाचार के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोधकर्ताओं को नवीन विचारों और व्यावहारिक समाधानों की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सतत विकास लक्ष्यों को केंद्र में रखकर अनुसंधान करें।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हरित नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि शोध आधारित शिक्षा से न केवल समाज को दिशा मिलती है, बल्कि उद्योगों को भी नवाचार से जोड़ने का कार्य होता है। विश्वविद्यालयों को ज्ञान सृजन के साथ-साथ उसके व्यावहारिक उपयोग पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने “शोध शिखर 2026” को अकादमिक और उद्योग जगत के बीच एक सशक्त सेतु बताया।
इस मौके पर डॉ नितिन वत्स, डायरेक्टर आईक्यूएसी ने कहा कि किसी भी विषय पर सार्थक और उपयोगी शोध के लिए उसे नए सिरे से समझना आवश्यक है। शोध केवल तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नवाचार, जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर अध्ययन करें।

डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि “शोध शिखर 2026” ने शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में बहुविषयक शोध, नवाचार और सतत विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। देश-विदेश से प्राप्त शोध पत्रों और विशेषज्ञ सहभागिता ने सम्मेलन की गुणवत्ता को और सुदृढ़ किया। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की।

विज्ञान पर्व में आज हुवे सत्र में
धरती की रक्षा के लिए जनभागीदारी और जिम्मेदार तकनीक जरूरी – संतोष चौबे
विज्ञान पर्व के दूसरे दिन आयोजित सत्र “ग्रीन साइंस और टेक्नोलॉजी में सार्वजनिक भागीदारी” में कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि धरती की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तकनीक और जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास पर जोर दिया। सत्र में डॉ. राकेश शुक्ला, डॉ. हरिओम प्रकाश, डॉ. भाव्या खन्ना और मनीष मोहन गोरे ने ग्रीन टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष तकनीक और पारंपरिक ज्ञान की भूमिका पर विचार साझा किए। चौबे ने सरकार द्वारा विज्ञान में जनसहभागिता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग समाजहित में होना चाहिए। अंत में सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त किया गया।

आइडिया कर्मशलाइजेशन प्रोजेक्ट में बेस्ट प्रोजेक्ट में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान, इसी कड़ी में वूमेन सेंट्रिक अवार्ड ओनली इन प्रोजेक्ट्स में पुरस्कृत किया गया।
1. प्रारंभिक ऊतक क्षति के उपचार हेतु फंगल मेलानिन आधारित क्रीम
लिलेश सागर, पूर्वी वर्मा, अखिलेश ताइगर, डॉ. शालिनी पांडे, (डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर)
2. केले के तने के अपशिष्ट से इको-फ्रेंडली पेंसिल निर्माण:
कम लागत एवं सतत नवाचार
मेघा सोनी, नीरज उपासिया, (सीवीआरयू, खंडवा)
3. हजारीबाग में मोबाइल ऐप आधारित प्रारंभिक कैंसर जोखिम पहचान एवं रेफरल सपोर्ट सिस्टम का विकास
एस. एन. बेहरा, (आईसेक्ट विश्वविद्यालय, झारखंड)
सांत्वना पुरस्कार
1. इकोपेस्ट ट्रैप
कांतिलाल भोमराज पाटिल
किसान
बेस्ट प्रोजेक्ट
1. दृष्टिहीनों के लिए अल्ट्रासोनिक चश्मा
मैडम हिमांशु, प्रशांत सिंह, गणपत विश्वविद्यालय, गुजरात
2. एग्री भारत आईओटी
राधे श्याम, सीवीआरयू, बिहार
3. स्काईट्रैक एआई
नई विवेक जयंतीभाई, डॉ. मेघना पटेल, गणपत विश्वविद्यालय, गुजरात
सांत्वना पुरस्कार
1. स्मार्ट फार्मिंग कृषि रोबोट
पटेल शसांग किरीटकुमार, श्रुति विमल कुमार मेवाड़ा, गणपत विश्वविद्यालय, गुजरात
2. व्यापारी जहाजों के लिए स्वचालित समुद्री डाकू पहचान एवं सुरक्षा प्रणाली
सम्प्रित साहा, आयुष कुमार सिंह, अरुण राठी, गणपत विश्वविद्यालय, गुजरात
महिला केंद्रित पुरस्कार
बंगाल में जलीय पौधे (जलकुंभी) का सतत उपयोग: समस्या से समाधान की ओर से पलक, सलोनी, आरएनटीयू, भोपाल को दिया गया
रिसर्च पेपर थीम्स एवं पुरस्कार
1. विज्ञान संचार (विज्ञान पर्व) – सतत भविष्य के लिए गोल्ड पुरस्कार: श्वेता शुक्लानी, प्लेटिनम पुरस्कार: तरेश पंथी(आरएनटीयू)
2. भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं सतत नवाचार में गोल्ड पुरस्कार: ज्योति रघुवंशी एवं प्रियांश पटेल, प्लेटिनम पुरस्कार: भगवती चरण शुक्ला एवं डॉ कृति सक्सेना
3. इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी और ग्रीन इनोवेशन में गोल्ड पुरस्कार: जोएटा मुखर्जी (सीवीआरयू, बिलासपुर छत्तीसगढ़), प्लेटिनम पुरस्कार: देवर्षि पटेल (गणपत विश्वविद्यालय)
4. मानविकी, कला एवं सतत समाज में गोल्ड पुरस्कार: संजय सर्खेल (आरएनटीयू), प्लेटिनम पुरस्कार: एम. सेंथिल (सेवेथा यूनिवर्सिटी, चेन्नई)
5. आधुनिक विज्ञान का सामाजिक प्रभाव में गोल्ड पुरस्कार: बर्खा शर्मा (आरएनटीयू), प्लेटिनम पुरस्कार: आकांक्षा मिश्रा
6. सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण नवाचार में गोल्ड पुरस्कार: वैदाही सोनी (सीवीआरयू, खंडवा, प्लेटिनम पुरस्कार: शैफाली राठौर (आरएनटीयू)
7. बिजनेस, मैनेजमेंट एवं ग्रीन इकोनॉमी में गोल्ड पुरस्कार: नूपुर कपूर, प्लेटिनम पुरस्कार: विंग कमांडर विजयेन्द्र गंगोपाध्याय
8. समग्र स्वास्थ्य, वेलनेस एवं पर्यावरणीय कल्याण में गोल्ड पुरस्कार: मनीषा जैन (वीआईटी, भोपाल,
प्लेटिनम पुरस्कार: निधि दत्तानी, (एसएमटी. पी. एन. दोशी महिला महाविद्यालय, घाटकोपर, मुंबई)
9. नवाचार एवं सततता हेतु शिक्षा में गोल्ड पुरस्कार: दानिश निहाल (आरएनटीयू), प्लेटिनम पुरस्कार: बबीता जोसेफ (आरएनटीयू), प्लेटिनम पुरस्कार: पैकर नासिर (आरएनटीयू)

सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित सत्रों में अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी एवं हरित नवाचार, समग्र स्वास्थ्य, वेलनेस एवं पर्यावरणीय कल्याण, समाज पर प्रभाव डालने वाला आधुनिक विज्ञान, सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण नवाचार, मानविकी, कला एवं सतत समाज, व्यवसाय प्रबंधन एवं हरित अर्थव्यवस्था, नवाचार एवं सततता के लिए शिक्षा, सतत विकास लक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में विधि, सुशासन एवं पर्यावरण नीति, विनिर्माण, ऑटोमेशन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन विकास तथा भारतीय ज्ञान परम्परा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। दो दिवसीय सम्मेलन के अंतर्गत देशभर से 800 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत देश-विदेश से लगभग 800 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिसने “शोध शिखर 2026” को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं शोध मंच के रूप में स्थापित किया। सम्मेलन के कन्वीनर डॉ. प्रतीक निगम ने सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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