परीक्षा और करियर – दबाव नहीं, दिशा चाहिए डर को पीछे छोड़ो, लक्ष्य को आगे रखो
विशेष लेख - सय्यद असीम अली


12वीं कक्षा की परीक्षा छात्र जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ होती है। यही वह समय होता है जब एक छात्र को यह तय करना होता है कि आगे उसे किस दिशा में जाना है। सही करियर का चुनाव केवल अच्छी नौकरी या सैलरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंतोष, सामाजिक सम्मान और भविष्य की स्थिरता से भी जुड़ा होता है। इसलिए एजुकेशन और करियर को लेकर लिया गया निर्णय जीवन की नींव तय करता है।
परीक्षा को उत्सव की तरह लेने का संदेश
जैसे ही परीक्षा का माह शुरू होता है, अधिकतर छात्रों में तनाव बढ़ने लगता है। नींद कम हो जाती है, मन घबराता है और बार-बार यही डर रहता है कि कहीं तैयारी अधूरी न रह जाए। लेकिन यह समझना बहुत ज़रूरी है कि टेंशन लेने से पढ़ाई बेहतर नहीं होती, बल्कि फोकस कमजोर हो जाता है। इसलिए छात्रों को सबसे पहले मानसिक रूप से खुद को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए।
परीक्षा के समय सही टाइम टेबल बनाना बेहद ज़रूरी है। पूरे सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर रोज़ाना पढ़ाई करें। कठिन विषय सुबह पढ़ें जब दिमाग सबसे ज़्यादा सक्रिय होता है और आसान विषय रात में दोहराएँ। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें, क्योंकि यही सबसे बड़ा ध्यान भटकाने वाला साधन है।
स्वस्थ दिनचर्या भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी पढ़ाई। पूरी नींद लें, समय पर भोजन करें और रोज़ थोड़ा-सा व्यायाम या वॉक जरूर करें। इससे दिमाग तरोताज़ा रहता है और याद करने की क्षमता बढ़ती है। बार-बार दूसरों से अपनी तुलना करने से बचें, क्योंकि हर छात्र की क्षमता अलग होती है।
डिग्री के आगे स्किल- जीत उन्हीं की जो खुद को अपग्रेड करें
आज का दौर केवल डिग्री का नहीं, बल्कि स्किल का है। पहले समय में अच्छी डिग्री मिल जाना ही सफलता की गारंटी माना जाता था, लेकिन आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। अब कंपनियां केवल यह नहीं देखतीं कि आपने क्या पढ़ा है, बल्कि यह देखती हैं कि आप क्या कर सकते हैं। आपकी प्रैक्टिकल नॉलेज, सोचने की क्षमता और काम करने की शैली ही आपकी असली पहचान बनती है।
टेक्नोलॉजी के विकास ने नौकरियों का स्वरूप बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन जैसे नए क्षेत्र उभर रहे हैं, जिनमें डिग्री से ज्यादा स्किल की मांग है। वहीं कई पारंपरिक नौकरियां धीरे-धीरे खत्म भी हो रही हैं। ऐसे में वही छात्र आगे बढ़ पाएंगे जो समय के साथ खुद को अपडेट करते रहेंगे।
आज सीखने के अवसर हर जगह हैं – ऑनलाइन कोर्स, वेबिनार, इंटर्नशिप, वर्कशॉप और प्रोजेक्ट्स। जो छात्र पढ़ाई के साथ-साथ नई चीज़ें सीखते हैं, उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और रोजगार की संभावना भी। इसलिए यह समझना जरूरी है कि डिग्री एक दरवाज़ा है, लेकिन स्किल वह चाबी है जो उस दरवाज़े को खोलती है। जीत उन्हीं की है, जो लगातार खुद को अपग्रेड करते रहते हैं।
भारत में शिक्षा व्यवस्था बहुत विशाल है। वर्तमान में देश में लगभग 24.8 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और 14.7 लाख से अधिक स्कूलों में करीब 1 करोड़ शिक्षक कार्यरत हैं। इसका अर्थ यह है कि प्रतियोगिता बहुत ज़्यादा है और केवल डिग्री के भरोसे आगे बढ़ना अब संभव नहीं है। हर छात्र को खुद को अलग साबित करना होगा।
आंकड़े यह भी बताते हैं कि करीब 67% छात्र पढ़ाई और करियर को लेकर मानसिक दबाव महसूस करते हैं, लेकिन 85% छात्र किसी से मदद या काउंसलिंग नहीं लेते। यही कारण है कि बहुत से छात्र अंदर ही अंदर घबराते रहते हैं और जल्दबाज़ी में गलत फैसले कर बैठते हैं।
आज की एक बड़ी समस्या यह है कि छात्र बिना करियर प्लानिंग के आगे बढ़ जाते हैं। लगभग 90% भारतीय छात्र बिना सही मार्गदर्शन के करियर चुनते हैं, जबकि केवल 10% छात्रों को प्रोफेशनल करियर काउंसलिंग मिल पाती है। बाद में यही छात्र कहते नजर आते हैं – “काश पहले सही सलाह मिल जाती।”
करियर और रोजगार की हकीकत भी आंख खोलने वाली है। भारत में केवल 8% ग्रेजुएट्स को ही उनकी पढ़ाई के अनुसार नौकरी मिलती है, जबकि ग्रेजुएट युवाओं की बेरोज़गारी दर लगभग 29% तक पहुंच चुकी है। इसका साफ मतलब है कि सिर्फ डिग्री से नौकरी की गारंटी नहीं मिलती।
यही वजह है कि आज स्किल गैप एक बड़ी समस्या बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार केवल 50% से थोड़े ज्यादा छात्र ही जॉब के लिए तैयार (Employable) माने जाते हैं। बाकी छात्रों में कम्युनिकेशन स्किल, टेक्नोलॉजी नॉलेज और प्रॉब्लम सॉल्विंग की कमी पाई जाती है। इसलिए अब पढ़ाई के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट बेहद जरूरी हो गया है।
12वीं के बाद करियर चुनते समय छात्रों को अपनी स्ट्रीम के अनुसार विकल्पों को समझना चाहिए।
साइंस स्ट्रीम में मेडिकल, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी, आईटी, डेटा साइंस और रिसर्च जैसे क्षेत्र हैं।
कॉमर्स स्ट्रीम में CA, CS, बैंकिंग, फाइनेंस, मैनेजमेंट, बीबीए और एमबीए जैसे मजबूत विकल्प हैं।
आर्ट्स स्ट्रीम में सिविल सर्विस, लॉ, जर्नलिज्म, मास कम्युनिकेशन, साइकोलॉजी, टीचिंग और डिजाइनिंग जैसे अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन, स्टार्टअप और फ्रीलांसिंग जैसे नए क्षेत्र भी तेजी से उभर रहे हैं।
कई बार छात्र को यह समझ नहीं आता कि वह किस क्षेत्र में जाए। ऐसे में करियर काउंसलिंग बहुत मददगार साबित हो सकती है। करियर काउंसलर छात्र की रुचि, क्षमता और व्यक्तित्व के आधार पर सही दिशा दिखा सकता है। माता-पिता और शिक्षकों से सलाह लेना भी जरूरी है, लेकिन अंतिम निर्णय छात्र को खुद लेना चाहिए।
करियर चुनते समय एक और जरूरी बात है – समय और धैर्य। सफलता रातों-रात नहीं मिलती। किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखना, खुद को अपडेट रखना और असफलताओं से सीखना बहुत ज़रूरी है। आज के समय में करियर बदलना भी सामान्य बात हो गई है, इसलिए गलत फैसले से घबराने के बजाय उससे सीख लेना ज्यादा जरूरी है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि आज का समय डिग्री का नहीं बल्कि दिशा, स्किल और आत्मविश्वास का है। जो छात्र खुद को पहचान लेता है, सही जानकारी जुटाता है और लगातार मेहनत करता है, वही असली सफलता हासिल करता है।
सही करियर वही है जिसमें केवल पैसा नहीं, बल्कि संतोष, सम्मान और आत्मविश्वास भी मिले।


