अध्यात्मखबरमध्य प्रदेश

नेहरू नगर में 24 कुंडी गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन

अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन एवं गायत्री शक्तिपीठ, एम.पी. नगर के सहयोग से नेहरू नगर गायत्री परिवार शाखा द्वारा लाल सिंह ग्राउंड में 24 कुंडी गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम संयोजक श्री देवांशु कसाना ने जानकारी देते हुए बताया कि आज देवावाहन के साथ यज्ञ का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात 26 दिसंबर 2025 को प्रातः 9:00 बजे से संगीतमय मंत्रोच्चार के साथ देव पूजन एवं यज्ञ अनुष्ठान प्रारंभ हुआ।
इस 24 कुंडी गायत्री महायज्ञ में लगभग 500 श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र के माध्यम से विश्व कल्याण, पर्यावरण शुद्धि, वैचारिक शुद्धता तथा परिवारों में संस्कारयुक्त वातावरण के निर्माण के संकल्प के साथ आहुतियाँ समर्पित की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य नैतिक शिक्षा का जागरण एवं सद्विचारों का प्रसार रहा।
दोपहर 3:00 बजे से आयोजित पावन प्रज्ञा पुराण कथा का वाचन कथावाचक श्री सुरेंद्रनाथ जी द्वारा किया गया। उन्होंने परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण को—जो 18 पुराणों का सार है—बड़े ही मार्मिक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि प्राचीन युगों में राक्षसी प्रवृत्तियाँ शरीर रूप में थीं, इसलिए भगवान ने सशरीर अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की। किंतु आज के कलियुग में राक्षसी प्रवृत्तियाँ मन के भीतर कुबुद्धि एवं कुविचार के रूप में प्रवेश कर चुकी हैं।
इन्हीं विकृत प्रवृत्तियों को समाप्त करने हेतु परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने 3200 से अधिक पुस्तकों का लेखन कर विचार क्रांति अभियान के माध्यम से जन-जन तक सद्विचारों का बीजारोपण किया तथा गायत्री महामंत्र को विश्वभर में फैलाया।
उन्होंने बताया कि आज देश के विभिन्न एम्स एवं मेडिकल कॉलेजों में गायत्री महामंत्र एवं मंत्र जाप पर वैज्ञानिक शोध किए जा रहे हैं, जिनमें इसकी सकारात्मक एवं वैज्ञानिक प्रभावशीलता सामने आ रही है। गायत्री महामंत्र को सद्बुद्धि का मंत्र बताया गया, जिसके नियमित जाप से विचारों में सकारात्मकता आती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा बच्चों के मानसिक एवं बौद्धिक विकास में विशेष लाभ होता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक एवं गायत्री परिवार के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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