सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय शिवाजी नगर भोपाल में मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित एवं परिवार विवाह परामर्श प्रकोष्ठ, समाजशास्त्र विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।


मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक 29-30 जनवरी 2026 को परिवार विवाह परामर्श प्रकोष्ठ एवं समाजशास्त्र विभाग द्वारा किया गया। जिसका विषय भारतीय परिवार व्यवस्थाः चुनौतियों एवं समाधान हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में एवं डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे व डॉ. भारती कुमारे सातनकर की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर एवं सरस्वती पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में महाविद्यालय की यशस्वी प्राचार्य डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव द्वारा अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया एवं छात्राओं में जागरूकता हेतु सर्टिफिकेट डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ करने की बात कही गई। तत्पश्चात् कार्यक्रम की संयोजक डॉ. निशा जैन द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के प्रथम दिवस पर मुख्य अतिथि डॉ. सदानंद सप्रे जी (सेवानिवृत्त प्राध्यापक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल म.प्र) ने अपने सारस्वत उद्बोधन का आरंभ”रोमा मिश्र मिट गए जहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी” पंक्तियों के माध्यम से किया। जिसमें भारतीय संस्कृति के महत्व को बताया, उन्होनें कहा कि भारतीय संस्कृति विशेष है जो कि सनातन से आज तक उतनी ही सशक्त और समृद्ध बनी हुई है जबकि अन्य राष्ट्रों की संस्कृति कभी विश्व में सर्वोपरि थी जबकि वर्तमान में लुप्त हो गई हैं। उन्होने छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से परिवार को जोड़ने तथा संस्कारित करने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि श्री कवीन्द्र कियावत जी (सेवानिवृत्त IAS) ने अपने बीज वक्तव्य में परिवार की परिभाषा बताते हुये मानव सभ्यता में परिवार व्यवस्था का कैसे विकास हुआ, पर अपनी विचार व्यक्त किये। उन्होनें संयुक्त परिवार की महत्ता को प्रतिपादित किया तथा वर्तमान में एकल परिवार के कारण विखरता परिवार एवंसामाजिक ह्यस पर चिंता व्यक्त की। उन्होने बताया कि भारतीय समाज एवं परिवार सदियों से संयुक्त परिवार में रहकर धार्मिक अनुष्ठानों, पर्व, तीज-त्यौहारों को एक साथ मनाया करते थे तथा बच्चों में सत्संग एवं प्रार्थना आदि के माध्यम से संस्कारित किया करते थे जबकि एकाकी परिवार में इन सब का अभाव दिखाई देता है जो कि भविष्य के लिये भारतीय परिवार व्यवस्था पर एक चुनौती हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. दिवाकर शर्मा जी सेवानिवृत्त प्राध्यापक समाजशास्त्र हरिसिंह गौर वि.वि. सागर ने अपने उद्बोधन में विषय का समाजशास्त्रीय पक्ष विस्तार से प्रस्तुत किया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्ष डॉ. भारती कुम्भारे सातनकर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वस्थ परिवार एवं स्वस्थ समाज में गीता के सिद्धांतों को आत्मसात करने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीना श्रीवास्तव एवं अभार डॉ. मनीषा शर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति की सचिव डॉ. अर्चना चौहान एवं डॉ. रानू वर्मा तथा सह-सचिव डॉ. नूतन केवट व डॉ. कीर्ति वर्मा का विशेष योगदान रहा।



