अध्यात्ममध्य प्रदेश

गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह पर बसंत पर्व पर प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण एवं वातावरण शोधन एवं भारतीय संस्कार परंपरा को जनजन तक पहुंचाने का लिया संकल्प

आज भोपाल गायत्री शक्तिपीठ पर परम वंदनीय माताजी की जन्म शताब्दी, अखंड दीप के 100 वर्ष एवं गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्मदिवस की सौभाग्य त्रिवेणी में उमड़े श्रद्धालु ।
परम वंदनीय माताजी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप स्थापना शताब्दी वर्ष के गरिमामय शुभारंभ के अंतर्गत, परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्मदिवस वसंत पंचमी के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ, भोपाल में 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में समाज के सभी आयु वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता प्रदान की।
वसंत पंचमी का पर्व माँ वीणापाणि सरस्वती की आराधना से विशेष रूप से जुड़ा होता है। इस शुभ अवसर पर अनेक विद्यार्थियों ने विद्यारंभ संस्कार में भाग लेकर ज्ञान, एकाग्रता एवं सदाचार का आशीर्वाद प्राप्त किया। संस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों को अध्ययनशीलता, अनुशासन एवं जीवन में सफलता के मूल्यों का बोध कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान 40 नए परिजनों ने गुरु दीक्षा ग्रहण कर परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक मार्गदर्शन को अपने जीवन में स्वीकार किया। साथ ही जन्मदिन, अन्नप्राशन, नामकरण, यज्ञोपवीत, एवं मुंडन जैसे महत्वपूर्ण वैदिक संस्कार विधिपूर्वक संपन्न हुए। दो युगलों ने वैवाहिक जीवन के अनुशासन एवं आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हुए यज्ञ में सहभागिता की एवं समाज में व्याप्त भव्यता से की जाने वाली शादियों के अपेक्षा वैदिक रीति नीति को शिरोधार्य किया।
24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ श्री रमेश अभिलाषी जी एवं महिला मंडल की टोली द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया।
परम पूज्य गुरुदेव की तपस्थली शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुसरण करते हुए पर्यावरण शोधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया एवं इस कार्य की पहल स्वरूप पर्यावरण शोधन हेतु विशेष आहुतियाँ दी गई एवं नागरिक कर्तव्यों का पालन करने हेतु प्रोत्साहन दिया गया ।
सामूहिक साधना से संपूर्ण वातावरण सात्त्विक, प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत किया, बल्कि सामाजिक एकता, संस्कार एवं संस्कृति संरक्षण का सशक्त संदेश भी दिया।
इस अवसर पर विद्यारंभ संस्कार युवाओं की टोली पंकज बड़ौदे की टीम द्वारा संपन्न कराया गया। दीक्षा संस्कार शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री सदानंद अंबेकर जी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जबकि अन्नप्राशन, मुंडन एवं नामकरण संस्कार श्री गंगा प्रसाद झारिया, जी.एल. मेघवाल एवं व्यास जी द्वारा विधिवत कराए गए।
यह आयोजन माताजी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप स्थापना शताब्दी वर्ष के अंतर्गत होने वाले आगामी कार्यक्रमों की एक प्रेरणादायी एवं सशक्त शुरुआत सिद्ध हुआ।

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