भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाती है : नीरज नयन महाराज
राजीव नगर में भव्य कलश यात्रा के बाद, श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ शुरू

भोपाल। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। यह परमहंसों की संहिता है, भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है।यह उपदेश वृंदावन से पधारे कथावाचक नीरज नयन महाराज ने राजीव नगर ए सेक्टर के शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिवस की कथा के दौरान भक्तों को दिये। कथा के शुभारंभ से पूर्व सुबह 9 बजे से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने महाराज जी का पुष्पवर्षा कर किया गया। इस अवसर पर कथा आयोजक रामसेवक शर्मा, श्रीमती जानकी शर्मा सहित सैंकड़ों लोग शामिल हुए।नीरज नयन महाराज जी ने कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है। उन्होंने श्रीकृष्ण ने भागवत गीता के माध्यम से बुराई व सदाचार के बीच अंतर बताया। ईश्वर को धन दौलत व यज्ञों से कोई सरोकार नहीं है। वह तो केवल स्वच्छ मन से की गयी आराधना के अधीन होता है। जात, पात व धर्म नहीं जानते। वह तो भक्ति मात्र के प्रेम को जानते हैं।