विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया ब्रह्मा बाबा का 57वां स्मृति दिवस
पूरे जनवरी मास चल रही योग साधना ब्लेसिंग हाउस में विश्व शांति हेतु ब्रह्माकुमारीज के सैकड़ों भाई बहनों ने की प्रार्थना - ब्रह्मा बाबा ने स्वर्णिम संसार के नवनिर्माण हेतु मातृशक्ति को आगे रखा। ल्यनिष्ठ संस्कारों से होगा स्वर्णिम संसार का नवनिर्माण



18 जनवरी, 2026’प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्य तिथि श्रद्घापूर्वक मनायी गई। आज सुबह से ही संगठित योग तपस्या भट्टी मेडिटेशन का प्रोग्राम ब्लेसिंग हाउस मेडिटेशन सेंटर में शुरू रहा।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ ब्लेसिंग हाउस की निदेशिका बी.के. डॉ. रीना दीदी ने कहा कि 18 जनवरी, 1969 मानव इतिहास में पवित्रतम दिवस है, जब आदिपिता” प्रजापिता ब्रह्मा, सम्पूर्ण स्थिति को प्राप्तकर अव्यक्त हुए, जो “विश्व प्रकाश स्तम्भ” बनकर आज भी विश्व कल्याण हेतु हमारे मार्ग प्रदर्शक हैं।
उन्होंने सन् 1936 में ईश्वरीय शक्ति से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना की । उस समय जब भारत में अनेक कुप्रथाएं जैसे सती प्रथा, बाल विवाह, दहेज प्रथा, आदि थीं, उस समय उन्होंने नारी को आध्यात्मिक रूप से सशक्त करने का महान कार्य किया । उनकी यह दूरदर्शिता ही थी कि आज ब्रह्माकुमारीज संस्थान महिलाओं द्वारा संचालित विश्व का सबसे बड़ा संस्थान है । उन्होंने योग एवं आध्यामिक ज्ञान की अलख जगाकर नारी सशक्तिकरण का अनूठा कार्य किया । आज उनके स्मृति दिवस पर हम सब उनकी शिक्षाओं को जीवन मे धारण करने का संकल्प लें ।
भोपाल स्थित ब्रह्माकुमारीज ब्लेसिंग हाउस सेवाकेन्द्र मे भी आज ब्रह्म मुहूर्त से ही योग साधना का दौर शुरू हो गया। श्वेत वस्त्रधारी ब्रह्माकुमार ब्रह्माकुमारी भाई बहने आज विशेष मौन धारण कर प्रातः काल से ही भगवान शिव की याद मे खोए हुए नजर आ रहे थे । सेवाकेन्द्र के मेडिटेशन हाल में साइलेन्स के वातावरण मे बैठकर सभी ने विश्व शांति के लिए प्रार्थना की ।
इस अवसर पर ब्लेसिंग हाउस भोपाल सेवाकेन्द्र में ब्रह्मा बाबा के समाधि स्थल पांडव भवन माउंट आबू स्थित शांति स्तम्भ जैसा हूबहू मॉडल बनाया गया । स्मृति दिवस के अवसर पर सभी बी के भाई बहनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए । कुछ भाई बहनों नें तीन दिन की योग साधना के अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि योग साधना से उनका मन पूरी तरह से स्थिर एवं शांत था। कोई भी नकारात्मक एवं व्यर्थ विचार मन मे नहीं आए ।



