पुण्य कर्म से ही मन की अस्थिरता दूर होती है – पूज्य भन्ते प्रज्ञारत्न थेरो
वर्षावास की दूसरी अमावश्या पर करुणा बुध्द विहार में पूज्य भन्ते प्रज्ञारत्न थेरो जी की धम्म देशना

तुलसी नगर स्थित करुणा बुध्द विहार आषाढ़ पूर्णिमा से निरंतर वर्षावासरत पूज्य भन्ते प्रज्ञारत्न थेरो जी व्दारा आज वर्षावास के 45 वें दिन तथा वर्षावास की दूसरी अमावस्या पर बड़ी संख्या उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को त्रिशरण पंचशील ग्रहण कराया गया। इसके पश्चात धम्म देशना देते हुए पूज्य भन्ते जी ने लघु जातक कथा के माध्यम से बताया कि कैसे पूण्य कर्म करने से मन की अस्थिरता दूर होती है और आप आनंदपूर्वक और निर्भीक होकर जीवन यापन करते हैं। पूण्य कर्म करना याने पंचशीलों का पालन कर उसके अनुसार अपना जीवन यापन करना है। यदि हम वास्तविक रुप से पंचशीलों का पालन करते हैं तो, निश्चित ही हमारे व्दारा काया वाचा और शरीर से किसी को भी हानि नहीं पहूचाई जायेगी तथा हमारे मन में दूसरों के प्रति करुणा, प्रेम जागृत होगा, जिससे हमारा चित्त शांत और निर्मलता से परिपूर्ण होगा। आपके प्रति लोगों में सदा आदर भावना होगी तथा आप सदैव प्रसन्नचित्त रहेंगे। आपका जीवन सुखमय होगा। तीन माह की वर्षावास की इस अवधि में अमावस्या, पूर्णिमा, अष्टमी के पावन अवसर पर उपोसथ व्रत का रखकर तथा पूरी वर्षावास की अवधि में पंचशील का पालन कर जीतना पूण्य अर्जित करना चाहते है, कर सकते हैं। जैसे पूज्य भिक्षुओं को धम्म दान देकर, शोलों का पालन कर, धम्म का श्रवण कर पूण्य अर्जित किया जा सकता है।
इस अवसर पर प्रबुद्ध महिला मंडल व्दारा पूज्य भन्ते जी को अपने घर पर तैयार किया गया भोजन दान किया। साथ ही धम्मदान भी किया। साथ ही पूज्य भन्ते जी की धम्मदेशना में उपस्थित सभी उपासक उपासिकाओं को भी भोजन ग्रहण कराया गया।
पूज्य भन्ते जी की धम्मदेशना में दि बुद्धिस्ट सोसायटी आफ इंडिया एवं प्रबुद्ध महिला मंडल की सभी पदाधिकारियों के साथ साथ बड़ी संख्या में भोपाल के अन्य बुद्ध विहारों के पदाधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।