अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में डॉ. विनीत तिवारी प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
जीवन वैभव पत्रिका के 40 वर्ष पूर्ण होने के सुनहरे अवसर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन ने ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा



भोपाल – जीवन वैभव पत्रिका के 40 वर्ष पूर्ण होने के सुनहरे अवसर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन ने ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं पत्रिका के संपादक डॉ. हेमचंद पांडे द्वारा कैरियर कॉलेज सभागार में आयोजित इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से पधारे 200 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने शिरकत की। इस ऐतिहासिक अवसर पर अखिल भारतीय ज्योतिष महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. विनीत तिवारी* को ज्योतिष जगत में उनके उल्लेखनीय एवं असाधारण योगदान के लिए *लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड* से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके अथक परिश्रम, ज्ञान-प्रसार, ज्योतिष के माध्यम से समाज सेवा तथा ज्योतिष जगत में दिए गए योगदान की जीती-जागती मिसाल है।
मुख्य अतिथि एवं अन्य विद्वानों द्वारा डॉ. विनीत तिवारी को शाल ओढ़ाकर, प्रमाण पत्र प्रदान कर और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और डॉ. तिवारी ने भावुक होकर सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. विनीत तिवारी ने मांगलिक दोष एवं वैवाहिक जीवन पर गहन व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कुंडली में यदि मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो तो जातक मांगलिक माना जाता है। ऐसी स्थिति में वैवाहिक जीवन में तनाव, अलगाव या जीवनसाथी की असमय मृत्यु जैसी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ *चमत्कार चिंतामणि* के अनुसार सप्तम भाव में मंगल पुरुष की कुंडली में स्त्री का और स्त्री की कुंडली में पुरुष का नाश करता है। डॉ. तिवारी ने मांगलिक दोष के सर्वोत्तम निवारण पर जोर देते हुए कहा कि मांगलिक वर के लिए मांगलिक कन्या का चुनाव ही सबसे उत्तम निवारण है, क्योंकि दोनों कुंडलियों में समान भावों में मंगल की उपस्थिति दोष को संतुलित करती है। साथ ही उन्होंने दोष निवारण के अनेक प्रभावी उपाय भी विस्तार से साझा किए, जो उपस्थित श्रोताओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कानपुर से पधारे विश्व-विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित के.ए. दुबे पद्मेश ने ज्योतिषियों के लिए आचार-संहिता पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नई दिल्ली से आए डॉ. अरुण बंसल (अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ के अध्यक्ष एवं ज्योतिष सॉफ्टवेयर के निर्माता) ने ज्योतिष सॉफ्टवेयर की उपयोगिता, आधुनिक तकनीक एवं विशेष ज्योतिषीय सूत्रों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
उल्लेखनीय है कि डॉ. विनीत तिवारी ज्योतिष जगत के एक ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें डॉक्टर आफ एस्ट्रोलॉजी , फेलोशिप ऑफ विश्व ज्योतिष विद्यापीठ, ज्योतिष पद्मश्री अवॉर्ड, ज्योतिष पद्म भूषण अवॉर्ड, विश्व ज्योतिष ब्रह्मऋषि अवॉर्ड, विश्व बंधु अवॉर्ड, गोल्डन अचीवमेंट अवॉर्ड, गंगोत्री गोमुख तीर्थ अवॉर्ड, एस्ट्रो शनी कालजयी अवॉर्ड, महर्षि वेदव्यास अवॉर्ड, वंदे मातरम अवॉर्ड, एस्ट्रो फ्रेंडशिप अवॉर्ड, नेताजी सुभाष चंद्र बोस अवॉर्ड (स्वर्ण पदक सहित), आर्य देवर्षि अवॉर्ड (स्वर्ण पदक सहित), इंडियन ग्रेट एस्ट्रोलॉजर अवॉर्ड (स्वर्ण पदक सहित), एन.सी. लहरी मेमोरियल गोल्ड मेडल, सेंट टेरेसा अवॉर्ड, भारत भूषण अवॉर्ड, माता गुह्येशवरी अवॉर्ड, पंडित मुरारी मोहन वेदांत तीर्थ मेमोरियल अवॉर्ड, एक्सीलेंस अवॉर्ड, ज्योतिष ऋषि सम्मान, वराह मिहिर सम्मान और वेदामृतम् सम्मान जैसे दर्जनों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
साथ ही उन्हें राज ज्योतिष, ज्योतिष गुरु, ज्योतिष सम्राट, ज्योतिष भास्कर, ज्योतिष महर्षि, ज्योतिष शिरोमणि, ज्योतिष महामहोपाध्याय, ज्योतिष महासागर, ज्योतिष वाचस्पति, ज्योतिष मार्तंड, ज्योतिष विशारद, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष रत्न, ज्योतिष अलंकार, ज्योतिष कलानिधि, ज्योतिष श्री, ज्योतिष मयूर, भारत जगन्नाथ भास्कर और सामुद्रिक सम्राट (स्वर्ण पदक सहित) जैसी अनेक प्रतिष्ठित उपाधियां प्राप्त हो चुकी हैं।
यह सम्मेलन ज्योतिष शास्त्र के प्रचार-प्रसार तथा ज्ञान के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हुआ। डॉ. विनीत तिवारी जैसे ज्योतिष के महान विद्वान के अथक प्रयासों और समर्पण ने ज्योतिष जगत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उनका यह सम्मान ज्योतिष प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण है और यह प्रमाणित करता है कि सच्ची साधना व समाज सेवा से प्राप्त सम्मान अमर हो जाता है। ऐसे आयोजन भविष्य में भी जारी रहेंगे, जो ज्योतिष के प्राचीन प्रकाश को नई पीढ़ी तक पहुँचाते रहेंगे।


