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मध्यक्षेत्र बिजली कम्पनी में करीब दस हजार आउटसोर्स कर्मियों के तबादलों से आउटसोर्स का हुआ दमन, इससे विद्युत हादसे बढ़ेंगे: भार्गव

भोपाल। म.प्र. मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के इतिहास में पहली बार करीब दस हजार बिजली आउटसोर्स लाईन अटेन्डेंट, सब-स्टेशन ऑपरेटर व कम्प्यूटर ऑपरेटरों के तबादले एम.डी. ऑफि के अनुमोदन के बाद 10 कि.मी. से लेकर 80 कि.मी. तक दूर किए जाने से हड़कम्प मच गया है। बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव का मत है कि इस कदम से बिजली कम्पनी में विद्युत हादसों में वृृद्धि होगी, क्योंकि कई जगह डबल, ट्रिपल सर्किट की विद्युत लाईनें हैं एवं क्रॉसिंग हैं, इससे अनभिज्ञ ठेका कर्मी के समक्ष नई जगह जाने से भयावह संकट पैदा होगा। साथ ही इससे बिजली कम्पनी का कामकाज छिन्न-भिन्न हो सकता है। इस बात को लेकर संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव एवं महामंत्री राहुल मालवीय व दिनेश सिसोदिया ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, चीफ सेक्रेट्री एवं अपर मुख्य सचिव ऊर्जा विभाग से हस्तक्षेप कर, इन तबादलों पर रोक लगाने की मांग की है।

सभी जिलों में हुए तबादले

भार्गव का कहना है कि पचास साल के इतिहास में मध्यप्रदेश के किसी भी विभाग में एवं बिजली सेक्टर में कभी भी एक साथ दो-तीन दिन में दस हजार तबादले नहीं हुए हैं, परन्तु इस बार मध्य क्षेत्र कम्पनी ने भोपाल सिटी सर्किल में 568, भोपाल संचा.संधा. वृत्त में 805, रायसेन में 775, सीहोर में 560, राजगढ़ में 1009, होशंगाबाद में 790, ग्वालियर सिटी सर्किल में 502, ग्वालियर ओ एण्ड एम सर्किल में 452, मुरैना में 552, भिण्ड में 620, दतिया में 386, शिवपुरी में 588, श्योपुर में 592 एवं अशोक नगर में 336 सहित सभी सर्किलों में करीब दस हजार बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मचारियों के तबादले कर हैरतअंगेज इतिहास रच दिया है।

अल्पवेतन में घर का खर्च चलाना मुश्किल

अल्पवेतन पाने वाले आउटसोर्स कर्मियों के इन तबादलों से उनके वेतन का आधा खर्च डीजल, पेट्रोल में ही चला जाएगा। उनका घरेलू बजट चरमरा जाएगा, इनके समक्ष जीवन-यापन व भरण-पोषण का संकट पैदा हो जाएगा। श्री भार्गव ने मुख्यमंत्री व उर्जा मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की, क्योंकि इससे गरीब वर्ग में शासन की छबि बिगडेगी।

एरियर देने में ढिलाई, पर ट्रांसफर में तेजी लाई

हाईकोर्ट बैंच इंदौर व श्रमायुक्त इंदौर के लिखित निर्देश के बावजूद भी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के करीब दस हजार आउटसोर्स कर्मी 11 माह का बकाया एरियर पाने से तीन माह बाद भी वंचित हैं, इस बात की चिंता बिजली कम्पनी को नहीं है, परन्तु बिजली कम्पनी ने दस हजार ट्रांसफर रातों-रात कर गजब की तत्परता दिखाई है।

विकलांग कर्मचारियों पर भी किया वज्रपात

भार्गव का कहना है कि इस बार बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मियों के हुए तबादलों में अमानवीयता का आलम यह था कि भोपाल के परवलिया सड़क में पदस्थ सब-स्टेशन ऑपरेटर राजू मेवाड़ा का बिजली कम्पनी में काम करते हुए गत 25 जून 2024 की विद्युत हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई, उन्हें हुई स्पाईन इन्जूरी के मामले में बिजली कम्पनी ने उन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया है, बल्कि तोहफे में उनका ट्रांसफर परवलिया सड़क से 16 कि.मी. दूर तूमड़ा में कर दिया है। भोपाल के गुनगा में पदस्थ विजय सिंह बचपन से ही दाये पैर में पोलियो के कारण विकलांग हैं, पर उन्हें 25 कि.मी. दूर ईटखेड़ी भेज दिया गया है। इसी तरह रायसेन डिवीजन में कार्यरत दिव्यांग राकेश सेन के.पी.ओ. का तबादला 30 कि.मी. दूर सलामतपुर वितरण केन्द्र में किया गया। ग्वालियर के समीप डबरा में पदस्थ दिव्यांग नीरज श्रीवास्तव को भी 50 कि.मी. दूर पिछोर ट्रांसफर कर दिया गया है। ग्वालियर के तानसेन जोन में पदस्थ विकलांग आउटसोर्स कर्मी नीलू सिंह को 10 कि.मी. दूर बिरला नगर ट्रांसफर किया गया है।

पहलीबार 300 से अधिक महिलाओं कर्मियों के भी हुए सामुहिक ट्रांसफर –

वर्ष 2018 में मध्य क्षेत्र बिजली कं. के तत्कालीन एम.डी. विवेक पोरवाल ने सामूहिक रूप से एक हजार रेगुलर कर्मियों के तबादले किए थे, पर तब दिव्यांगों व महिलाओं के तबादले नहीं किए गए थे, पर इस बार तो गैर-मानवीय रूख यह रहा कि तबादलों में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और तीन सौ से अधिक बिजली आउटसोर्स महिला कर्मियों के दूर-दराज क्षेत्र में ट्रांसफर किए गए, जिसमें कई इलाके ऐसे हैं, जहां महिलाओं को आना-जाना भी कठिन होगा।

तबादलों की जांच सी.बी.आई. को सौंपी जाए

भार्गव का कहना है कि इन आउटसोर्स कर्मियों के ट्रांसफर में परदे के पीछे ठेकेदारों ने जो खेल किया है और इस खेल में किसको क्या मिला है, इसकी जांच सी.बी.आई. को सौंपी जाए। श्री भार्गव ने 300 से अधिक बिजली आउटसोर्स महिला कर्मियों के हुए तबादलों में ठेकेदारों की कथित भूमिका की भी सी.बी.आई. से जांच कराने की मांग की है।

इन हजारों तबादलों से क्या गढ़बढ़ाएगा?

श्री भार्गव के मुताबिक बिजली कम्पनियों में स्पेशलाईजेशन का महत्व है, कोई स्थापना, कोई वर्क्स, कोई राजस्व व कोई लेटर ड्राफ्टिंग का जानकार होता है, पर अचानक हुए इन दस हजार तबादलों से एन.जी.बी. का काम, एन.एस.सी. का काम, के.वाय.सी. का काम, जानकारी भेजने व डाटा कलेक्शन का काम बुरी तरह प्रभावित होगा, राजस्व वसूली में भारी गिरावट आएगी, आने वाले बरसात के समय में बिद्युत आपूर्ति प्रभावित होगी एवं विद्युत हादसे बढ़ेंगे। इस मामले में महामंत्री दिनेश सिसोदिया का कहना है कि आगर-मालवा में इसी ट्रांसफर नीति के कारण गत अप्रैल एवं मई माह में जयसिंहपुरा व सुसनेर में दो बिजली ठेकाकर्मी मर गए और चार ठेकाकर्मी विद्युत हादसों में घायल होकर इन दिनों अस्पताल में भर्ती हैं। भयभीत होकर वहां कुछ कर्मचारी अपना इस्तीफा दे रहे हैं। इसलिए ट्रांसफर नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। महामंत्री राहुल मालवीय का कहना है कि म.प्र. की शेष पॉंच बिजली कम्पनियों में आउटसोर्स कर्मियों के सामुहिक तबादले नहीं हुए हैं तो मध्य क्षेत्र कं. में अचानक इस तरह का कदम उठाना ढेरों प्रश्नचिन्ह लगाता है।

कई वर्षों तक एक ही नगर में तैनात कर्मियों के मामले में अलग पॉलिसी क्यों? –

हैरत की बात है कि एम.डी. ऑफिस एवं चीफ इंजीनियर ऑफिस के आउटसोर्सकर्मी इन तबादलों से अनछुए हैं। इसी तरह मध्य क्षेत्र विद्युत कम्पनी में भारी तादात में कई ऐसे इंजीनियर अधिकारी व रेगुलर कर्मचारी हैं जिन्होंने अपनी कुल सेवा अवधि का अस्सी प्रतिशत सेवाकाल एक ही नगर में बिताया, पर वह अभी भी एक ही नगर में कई वर्षों से जमे हुए हैं, पर इन पावरफुल अधिकारियों व नियमित कर्मचारियों पर तबादलों की गाज गिराने की जगह अल्पवेतन पाने वाले छोटे बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कार्य में सुधार कम, व्यवस्थाएँ चरमराने की आशंका अधिक है।

पहले कहते थे आउटसोर्स हमारा आदमी नहीं, पर अब बिजली कं. ने ट्रांसफर ऑर्डर निकाले

श्री भार्गव का कहना है कि अक्सर विद्युत हादसों के अवसर पर बिजली कम्पनियाँ सफाई देती थीं कि बिजली आउटसोर्स कर्मी हमारे आदमी नहीं हैं, तो अब अचानक बिजली कं. के उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर से ट्रांसफर आर्डर पब्लिक डोमिन में कैसे जारी हो गए। इन ऑर्डर से यह स्पष्ट हो गया है कि बिजली कम्पनी ही आउटसोर्स कर्मियों की प्रिंसिपल नियोक्ता है।

 

 

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