आष्टा के किसानों से मिले पूर्व मंत्री एवं विधायक जयवर्धन सिंह, उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ उठाई आवाज़
गेल इंडिया द्वारा उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण को लेकर आष्टा के किसानो ने पूर्व मंत्री एवं विधायक जयवर्धन सिंह से मुलाकात की

भोपाल , सीहोर जिले की आष्टा तहसील में गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा स्थापित की जाने वाली इथेन क्रैकर प्लांट ( सह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स ) की स्थापना के लिए किसानों की उपजाऊ एवं सिंचित भूमि के अधिग्रहण का विरोध तेज हो रहा है। इसी को लेकर आज ग्राम खानादौरापुरा, ग्राम अरनिया दाउद, ग्राम बापचा एवं ग्राम बागेर के किसानों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व मंत्री एवं विधायक जयवर्धन सिंह से मिला । किसानों ने जयवर्धन सिंह को बताया कि गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा स्थापित की जाने वाली इथेन क्रैकर प्लांट ( सह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स ) की स्थापना के लिए शासन-प्रशासन द्वारा लगभग 900 एकड़ उपजाऊ व सिंचित कृषि भूमि का अधिग्रहण करने का प्रयास किया जा रहा है, जिस पर 5 हजार से अधिक किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह निर्भर हैं। इस भूमि से ही उनके परिवार का भरण-पोषण, अन्न उत्पादन और पशुधन के लिए चारे की व्यवस्था होती है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ भूमि नहीं देंगे। किसानों ने जयवर्धन सिंह को यह भी बताया कि ग्राम सीमा से सटे क्षेत्र में ही पर्याप्त शासकीय अनुपजाऊ व बंजर भूमि उपलब्ध है, साथ ही कई उद्योगपतियों की निजी अनुपजाऊ जमीन भी इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। ऐसे में किसानों की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण करना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि प्रदेश की खाद्य सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
किसानों की समस्याएँ सुनने के बाद जयवर्धन सिंह जी ने पूर्ण आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से विधानसभा व अन्य उचित मंचों पर उठाएँगे और किसानों के साथ हर स्तर पर खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की उपजाऊ जमीन किसी भी परिस्थिति में छीनी नहीं जानी चाहिए।
किसानों ने जयवर्धन सिंह जी का आभार व्यक्त किया और भरोसा जताया कि उनकी आवाज़ अब और मजबूती से सरकार तक पहुँचेगी।
जयवर्धन सिंह ने कहा कि हमारी मांग हैं कि –
1. ग्राम खानादौरापुरा, अरनिया दाउद, बापचा एवं बागेर की उपजाऊ एवं सिंचित भूमि का अधिग्रहण तुरंत रोका जाए।
2. औद्योगिक परियोजनाओं हेतु केवल शासकीय अनुपजाऊ एवं बंजर भूमि का ही उपयोग किया जाए।
3. किसानों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।