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वायुसेना की तैनाती से AAIB जांच तक, विमान हादसे के बाद क्या-क्या हुआ

बारामती विमान हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत के बाद वायुसेना और एएआईबी ने मोर्चा संभाल लिया है। आईएएफ ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और मौसम सेवाओं के लिए टीम तैनात की, जबकि एएआईबी ने मामले की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री  अजित पवार की मौत वाले बारामती विमान हादसे के बाद प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर तेजी से कदम उठाए गए हैं। एक ओर भारतीय वायुसेना ने मौके पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल और मौसम सेवाओं के लिए विशेष टीम तैनात की है, वहीं दूसरी ओर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। हादसे ने विमानन सुरक्षा, छोटे हवाईअड्डों की तैयारियों और तकनीकी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।पहले जानते हैं हादसा कैसे हुआ?
यह दुर्घटना बुधवार सुबह उस समय हुई, जब मुंबई से बारामती आ रहा लियरजेट 45 विमान खराब दृश्यता के कारण एक बार ‘गो-अराउंड’ करने के बाद दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश कर रहा था। विमान को उतरने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन अंतिम क्षणों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल को कोई ‘रीड-बैक’ नहीं मिला। इसके कुछ ही पलों बाद विमान रनवे के किनारे आग की चपेट में आ गया। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई।

वायुसेना की त्वरित कार्रवाई क्यों अहम?
भारतीय वायुसेना ने नागरिक प्रशासन के तत्काल अनुरोध पर बारामती हवाईअड्डे पर एयर वारियर्स की एक समर्पित टीम तैनात की। यह टीम अस्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल और मौसम संबंधी सेवाएं दे रही है, ताकि जांच और अन्य उड़ान गतिविधियां सुरक्षित तरीके से हो सकें। वायुसेना ने कहा कि यह कदम आपात स्थिति में राष्ट्रीय सेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एएआईबी जांच में किन बिंदुओं पर फोकस?

  • विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की विशेष टीम बुधवार शाम दुर्घटनास्थल पर पहुंची और फॉरेंसिक जांच शुरू की।
  • जांच के दायरे में शामिल लैंडिंग के समय तकनीकी स्थिति की जांच की गई।
  • पायलट और एटीसी के बीच हुए संवाद को भी सुना गया।
  • खराब दृश्यता और मौसम की भूमिका को लेकर भी पड़ताल हुई।
  • रनवे और नेविगेशन सुविधाओं की उपलब्धता

अनियंत्रित हवाईअड्डा और आईएलएस की कमी
बारामती हवाईअड्डा अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड की श्रेणी में आता है। यहां कोई इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम मौजूद नहीं है, जो खराब मौसम या कम दृश्यता में पायलट को सटीक मार्गदर्शन देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रनवे पर आइएलएस जैसी सुविधा होती, तो यह हादसा टल सकता था। यह सवाल अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।विमान और ऑपरेटर से जुड़े तथ्य
हादसे का शिकार हुआ विमान 16 साल पुराना लियरजेट 45 था, जिसका पंजीकरण वीटी-एसएसके था। इसे दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड संचालित कर रही थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, लैंडिंग के समय हवा शांत थी और दृश्यता करीब 3,000 मीटर थी, लेकिन फिर भी पायलट को दृश्य मौसम स्थितियों में उतरने की सलाह दी गई थी।

अब सबकी नजर एएआईबी की विस्तृत रिपोर्ट पर है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि हादसा तकनीकी खामी, मानवीय चूक, बुनियादी ढांचे की कमी या इन सभी कारणों का नतीजा था। साथ ही यह भी तय होगा कि छोटे और अनियंत्रित हवाईअड्डों पर सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की जरूरत है या नहीं।

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