

कोलकाता, 23 जनवरी 2026: पूर्वी भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे ने उन्नत पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज (PAD) से पीड़ित 62 वर्षीय पुरुष मरीज पर पहली बार सफलतापूर्वक स्टेम सेल थेरेपी की है। कोलकाता निवासी सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी आशीष मुखर्जी (नाम परिवर्तित) का यह जटिल उपचार डॉ. जयंत दास, कंसल्टेंट – वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर सर्जरी, मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे तथा डॉ. कृष्णेंदु मुखर्जी, कंसल्टेंट – वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर सर्जरी, मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे की विशेषज्ञता में किया गया।
मरीज लंबे समय से धूम्रपान करता था और लगभग एक वर्ष पहले उसे PAD का पता चला था। उस समय उसे एंजियोप्लास्टी और आवश्यकता पड़ने पर स्टेंट लगाने की सलाह दी गई थी। पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज (PAD) एक ऐसी बीमारी है जिसमें पैरों की रक्त नलिकाएं संकरी हो जाती हैं या अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इसके कारण पैरों में दर्द, न भरने वाले घाव और गंभीर मामलों में संक्रमण या अंग विच्छेदन तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। धूम्रपान, मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल इसके प्रमुख कारण हैं।
हालांकि, नियमित फॉलो-अप न होने और बीमारी के बढ़ने के कारण मरीज बाद में गंभीर क्रिटिकल लिम्ब इस्केमिया की स्थिति में अस्पताल पहुंचा, जिसमें हाथ या पैर में रक्त प्रवाह पूरी तरह बाधित हो जाता है, साथ ही एक सक्रिय न भरने वाला घाव भी मौजूद था। उन्नत एंजियोग्राफी में यह सामने आया कि धमनियों के भीतर रक्त प्रवाह के लिए आवश्यक खोखला भाग (आर्टेरियल ल्यूमेन) दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके कारण पारंपरिक सर्जरी या एंडोवैस्कुलर उपचार संभव नहीं था। ऐसे में अंग विच्छेदन ही एकमात्र विकल्प बचा था। इस स्थिति में डॉ. जयंत दास के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने स्टेम सेल थेरेपी का सुझाव दिया। यह एक ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें विशेष कोशिकाओं का उपयोग कर क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत की जाती है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, खासकर तब जब अन्य उपचार विकल्प संभव न हों।
मरीज को उपचार के दिन ही अस्पताल में भर्ती किया गया और अगले ही दिन उसे छुट्टी दे दी गई। उल्लेखनीय रूप से, उपचार के 24 घंटे के भीतर ही मरीज को तीव्र दर्द से पूरी तरह राहत मिल गई। आने वाले छह सप्ताह में घाव के भरने की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
इस मामले पर बात करते हुए डॉ. जयंत दास ने कहा, “उन्नत पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज में, जब रक्त नलिकाओं के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी संभव नहीं होती, तब स्टेम सेल थेरेपी अंग बचाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरती है। इस मरीज के पास कोई प्रभावी सर्जिकल विकल्प नहीं था और अंग विच्छेदन का खतरा बहुत अधिक था। स्टेम सेल थेरेपी के परिणामस्वरूप 24 घंटे के भीतर ही गंभीर आराम के समय होने वाले दर्द में स्पष्ट कमी आई, जो क्रिटिकल लिम्ब इस्केमिया के मरीजों में रक्त प्रवाह और जीवन की गुणवत्ता सुधारने की क्षमता को दर्शाता है।”
इस पर डॉ. कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा, “गंभीर धमनियों के अवरोध के कारण होने वाली क्रिटिकल लिम्ब इस्केमिया में उपचार के विकल्प बहुत सीमित रह जाते हैं और कई मामलों में मरीजों को अंग विच्छेदन की ओर धकेल दिया जाता है। इस मामले में, सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन करने के बाद स्टेम सेल थेरेपी की योजना बनाई गई और उसे सफलतापूर्वक लागू किया गया, क्योंकि कोई भी पारंपरिक सर्जिकल या एंडोवैस्कुलर उपचार संभव नहीं था। विशेष रूप से, दर्द से तेजी से राहत मिलना उत्साहजनक है और यह जटिल वैस्कुलर मामलों में उन्नत उपचार पद्धतियों की भूमिका को रेखांकित करता है।”
अपनी राहत व्यक्त करते हुए आशीष मुखर्जी (नाम परिवर्तित) ने कहा, “जब मुझे बताया गया कि अब कोई सर्जरी संभव नहीं है और अंग काटना पड़ सकता है, तो मैं बहुत निराश हो गया था। स्टेम सेल थेरेपी ने मुझे एक नया विकल्प और नई उम्मीद दी। सिर्फ एक दिन के भीतर मेरा दर्द काफी कम हो गया। इस उपचार के लिए मैं मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे की पूरी चिकित्सा टीम का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।”



