अध्यात्ममध्य प्रदेश

विवाह एक मांगलिक अनुष्ठान है , इसे सादगी और धर्म के अनुसार करना चाहिए — मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

भोपाल / आज पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मेँ जन्म कल्यानक के अवसर पर शंका समाधान कार्यक्रम मेँ मुनि श्री ने कहा कि आज विवाह आयोजन विसंगति बनते जा रहे हैँ, ताम झाम को तबज्जो दी रही हैँ जो सर्वथा अनुचित हैँ.. इस अवसर पर मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने पूछा कि मान सम्मान मिलता हैँ उससे अभिमान न हो ये मान सम्मान बना रहे इसके लिए क्या करें मुनि श्री – जो मान सम्मान मिला हैँ बो दायित्व के निर्बाहन के लिए मिला हैँ, अपने दायित्व निभाते जाएँ तो मान सम्मान हमेशा बना रहेगा, जिस जनता ने आपको मान सम्मान दिया हैँ उसकी अपेक्षाओं पर खरे उतरें आपका सम्मान बरकरार रहेगा.. इस अवसर पर जिलाध्यक्ष भाजपा रविन्द्र यति ने मुनि श्री को कोलार आने का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया,, डॉक्टर पंकज प्रधान ने पूछा कि जिनायतन और धर्मआयतन तो बहुत बन गए परन्तु मनुष्य के परमात्मा बनने कि प्रक्रिया को जीवंत रूप मेँ दिखाने के लिए गुनायतन बना हैँ उसमे प्रथम गुणस्थान से लेकर चौदवे गुणस्थान तक कि क्रिया दिखाई जायेगी, वर्तमान के वीतरागी साधक कौन से गुणस्थान तक जा सकते हैँ?? मुनि श्री — वर्तमान मेँ जो वीतरागी साधक हैँ बो समाधि मरण के उपरांत सातवे गुणस्थान तक जा सकते हैँ अभी इतनी अनुकूल स्थिति नहीं हैँ इसलिए भविष्य काल मेँ अपनी कठिन साधना से बो चौदवे गुणस्थान तक जा सकते हैँ… छुललक स्वरुप सागर jजी ने प्रश्न किया कि धर्म पुरुषार्थ के लिए क्या क्या किया जाए,,, मुनि श्री — हमारे साथ 24 घंटे धर्म बना रहना चाहिए, धर्म मंदिर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, प्रत्येक विचार और व्यवहार मेँ होना चाहिए, अनीति और अन्याय से दूर रहो यही धर्म है जीवन कि हर क्रिया मेँ धर्म होना चाइये,, पूजा भगवान की तन्मयता सेकरते हो तो सांसारिक कार्य भी तन्मयता के साथ करो, यही धर्म हैँ… इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेग सागर जी ने कहा की आज हम कहीं कर्तव्य से विमुख न हो, जन्मकल्यानक पर आप इस पर मार्गदर्शन करें,, मुनि श्री प्रमाण सागर जी — विवाह के उपरांत संस्कृति की रक्षा के लिए संतान उत्पत्ति के कर्तव्य का पालन अवश्य करें, धर्म की रक्षा तभी होंगी ज़ब संतती को उत्पन्न करके उसे संयम का पाठ भी दें, अपने ऊपर संयम रखेंगे तो नैसर्गिक जीवन जियेंगे, मनुष्य जीवन नर से नारायण बनने के लिए हैँ, नर से नारकीय बनने के लिए नहीं हुआ,.. इस अवसर पर सुनील मुरारिया, सुनील पटेल, वी सी जैन, डॉक्टर जितेंद्र जैन आदि ने अपने प्रश्न किये जिनका मुनि श्री ने सटीक समाधान किया,, अतिथिओं का स्वागत अमर जैन, महेश बारी, राकेश अनुपम, अनुभव सराफ, प्रसम जैन, अरविन्द सुपारी, प्रशांत जैन आदि ने किया..  डॉक्टर पंकज प्रधान भोपाल

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