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संविधान विहीन भारत” विषय पर हुआ सार्थक विमर्श, बहुजन चेतना को नई ऊर्जा मिली

भोपाल: सामाजिक न्याय, बहुजन चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए “बहुजन इंटेलेक्ट समिट – चैप्टर 3” का सफल आयोजन आज दिनांक 26 अप्रैल 2025 को रवीन्द्र भवन, भोपाल के सभागार में संपन्न हुआ।
विषय था — “संविधान विहीन भारत” (एक काल्पनिक दृष्टिकोण), जिस पर गहन और विचारोत्तेजक विमर्श हुआ। समिट के मुख्य अतिथि प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा: “संविधान मात्र एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार है। यदि यह कमजोर होता है तो समाज की नींव भी हिलती है। हमें संवैधानिक मूल्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा।”कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश) ने कहा:
“आज देश में जिस प्रकार से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, वह गहरी चिंता का विषय है। बहुजन समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।” मुख्य अतिथि श्री जीतू पटवारी (प्रदेश अध्यक्ष, मध्यप्रदेश कांग्रेस) ने कहा:”संविधान यदि सुरक्षित रहेगा तभी सामाजिक न्याय और समानता संभव है। यह समिट समय की पुकार है। बहुजन चेतना के इस जागरण में हम सबको सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।”

डॉ. (मेजर) मनोज राजे और श्री इनायत अब्बास ने संयुक्त वक्तव्य में कहा: “यह समिट केवल चर्चा नहीं, बल्कि बहुजन चेतना का एक आंदोलन है। जब संविधान संकट में हो, तब हर बहुजन को वैचारिक रूप से सजग होना जरूरी है।”

श्री सुनील बोरसे और श्री दिलीप म्हसके ने कहा: “यह आयोजन बहुजन आत्मसम्मान और वैचारिक क्रांति का सशक्त मंच है। सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई का यह नया चरण है।”डॉ. देवेंद्र सिंह धाकड़ और श्री योगेश मानसिंह कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा:”संविधान की रक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हम इस मंच से ओबीसी आरक्षण 18% से बढ़ाकर 27% किए जाने की भी जोरदार मांग करते हैं। हम इस आवाज को निरंतर उठाते रहेंगे।” श्री तेज कुमार तिग्गा और श्री हुमैद शकील ने कहा: “आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की संवैधानिक सुरक्षा बेहद आवश्यक है। यह समिट उनकी भूमिका को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। बहुजन एकजुटता इस समिट की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।”

आयोजन का विशेष आकर्षण:
समिट के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें युवा प्रतिभागियों ने संविधान, सामाजिक न्याय, आरक्षण और बहुजन एकता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए और वरिष्ठ वक्ताओं ने उनके सवालों का गंभीरता से उत्तर दिया।
समिट में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान जोश, ऊर्जा और वैचारिक गंभीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

आभार:
आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, मीडिया बंधुओं और समर्थकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति ने घोषणा की कि जल्द ही समिट का अगला अध्याय भी देश के अन्य हिस्सों में आयोजित किया जाएगा।

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