एमपी ट्रांसको के 132 केवी सबस्टेशन बड़ोदा (श्योपुर) को अतिक्रमण से मिली सुरक्षा
माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप से टली बड़े क्षेत्र में विद्युत व्यवधान की आशंका

भोपाल। माननीय न्यायालय श्योपुरने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के 132 केवी सबस्टेशन बड़ोदा (श्योपुर) के आसपास भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमण एवं सबस्टेशन से सटे तालाब के अनधिकृत विस्तार पर सख्त रोक लगाते हुए अतिक्रमणकारी को तत्काल सभी गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए हैं। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट रुप से आदेशित किया है कि किसी भी अवैधानिक कृत्य से श्योपुर जिले के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति करने वाले इस महत्वपूर्ण सबस्टेशन को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
—सबस्टेशन के अस्तित्व पर मंडराने लगा था खतरा–
उल्लेखनीय है कि सबस्टेशन के आसपास की भूमि पर अतिक्रमण के चलते धीरे-धीरे गहरा तालाब विकसित कर लिया गया था, जिससे सबस्टेशन की फेंसिंग एवं सिविल फाउंडेशन कमजोर होने लगे थे। इस स्थिति से न केवल सबस्टेशन के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था, बल्कि श्योपुर जिले के बड़े हिस्से में लंबे समय तक विद्युत आपूर्ति बाधित होने की गंभीर आशंका भी उत्पन्न हो गई थी।
-अतिक्रमणकारी को लगातार दी गई थी समझाइश–
एमपी ट्रांसको के स्थानीय अधिकारियों द्वारा लगातार अतिक्रमणकारियों को निर्माण कार्य रोकने के लिए समझाइश दी गई, किंतु जब खतरा अत्यधिक बढ़ गया, तब कंपनी को माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। इस संबंध में माननीय न्यायालय श्योपुर में प्रकरण दायर किया गया, जिसमें न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एमपी ट्रांसको को राहत प्रदान की।
—कार्यपालन अभियंता अजीत वर्मा ने प्रस्तुत किये प्रभावी तथ्य–
प्रकरण की पैरवी मे ओईसी कार्यपालन अभियंता शिवपुरी अजीत वर्मा ने तथ्यों एवं तकनीकी जोखिमों को प्रभावी ढंग से माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। माननीय
न्यायालय के इस निर्णय से न केवल सबस्टेशन की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि क्षेत्र में संभावित बड़े विद्युत व्यवधान को भी समय रहते टाल दिया गया है।


