एजुकेशनमध्य प्रदेश

ना मंत्री ने सुनी ना सीएम मिले, नवनियुक्त शिक्षक हुए हताश

ट्रांसफर पाॅलिसी में शिथिलता की मांग, नवनियुक्त शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन

भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय शालाओं में पदस्थ शिक्षकांे को विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक की बेरूखी से दो चार होना पड़ा। मंगलवार को अपनी मांगों और परेशानियों को लेकर पहले तो ये नवनियुक्त शिक्षक विभागीय मंत्री विजय शाह के बंगले पहुंचे थे। यहां पर शाह ने अपनी कार में बैठते हुए ही इन शिक्षकों से कह दिया कि वे कुछ नहीं कर सकते, इतना कहते हुए ही वे बंगले से निकल गए। इसके बाद जब आधा सैकड़ा से ज्यादा ये नवनियुक्त शिक्षक मुख्यंत्री निवास पहुंचे तो यहां उनके पीए सहित अन्य स्टाफ से ये कहकर बेरंग ही लौटा दिया कि सीएम साहब व्यस्त हैं। बाद में इन शिक्षकों ने आदि भवन पहुंचकर जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त को शासन की स्थानांतरण नीति में शिथिलता प्रदान करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ये ऐसे शिक्षक हैं जिनकी पदस्थापना को अभी तीन साल पूरे नहीं हुए हैं। परीवीक्षा अवधि वाले इन शिक्षकों का कहना है कि इनमें अधिकांश शिक्षक अपने घर से कई किलोमीटर दूर नौकरी कर रहे हैं। इन्हें अपनी डयूटी के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी वहन करना होता है। अपने निवास स्थान के काफी दूर रहने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में इन शिक्षकों ने कहा है कि स्थानांतरण नीति 2025 में शिथिलता प्रदान करते हुए इन शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाए। शिक्षकों ने बताया कि इससे पूर्व स्थानांतरण नीति 2022 में भी नवनियुक्त शिक्षकों को शामिल किया गया था। ज्ञापन में ये भी मांग की गई है कि स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 में सभी शिक्षकों को जनजातीय कार्य विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में पारस्परिक स्थानांतरण की अनुमति प्रदान की जाए ताकि पद संख्या प्रभावित हुए बिना शिक्षक अपने निवास स्थान के समीप पहुंच कर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें। नवनियुक्त शिक्षकों में बड़ी तादाद में विवाहित महिलाएं और अविवाहित युवतियां भी शामिल हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थापना मिली हैं जहां से उन्हें घर जाने के लिए सीधे यात्री बस-ट्रेन अथवा अन्य साधन नहीं मिलते जिसके कारण अवकाश के दिन भी वह घर नहीं जा सकतीं। इनमें से कुछेक तो ऐसी भी हैं जिनके माता-पिता इन दुनिया में नहीं हैं, वो अपने भाई या बहन के साथ रहतीं हैं। कुछ युवतियां तो ऐसे क्षेत्रों में पदस्थ जहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधा भी नहीं हैं। इन नवनियुक्त शिक्षकों का कहना है कि मानवीय आधार पर स्थानांतरण नीति 2025 में शिथिलता प्रदान करते हुए इन्हें भी ट्रांसफर हेतू आवेदन करने का मौका दिया जाए। यहां ये बताना लाजमी होगा कि शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार ट्रांसफर के लिए वही नवनियुक्त शिक्षक पात्र होते हैं जिनकी पदस्थापना को तीन साल पूरे हो जाते हैं। लेकिन जो परिवीक्षा अवधि में होते हैं अथवा जिन्हें तीन वर्ष पूरे नहीं होते वे जब ट्रांसफर के लिए पोर्टल में अपनी आईडी डालकर ओपन करते हैं तो पोर्टल ओपन नहीं होता जिसकी वजह से वे ट्रांसफर के लिए आवेदन ही नहीं कर पाते। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय शालाओं में पदस्थ नवनियुक्त शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव, विभागीय मंत्री विजय शाह से मांग की है कि मानवीय आधार पर उनके ज्ञापन पर विचार किया जाए और ट्रांसफर नीति में शिथिलता प्रदान की जाए।
– ना शाह ने सुनी ना सीएम मिले
प्रदेश के अलग-अलग शहरों में पदस्थ ये शिक्षक मंगलवार को भोपाल में एकत्रित हुए थे। आधा सैकड़ा ये ज्यादा ये शिक्षक भोपाल के अलावा अन्य शहरों के रहने वाले थे। अपनी मांगों और परेशानियों को शासन तक पहुंचाने के लिए ये शिक्षक जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, दिन भर कभी सीएम हाउस तो कभी विजय शाह के आवास तो कभी आयुक्त कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। पहले तो ये विजय शाह के बंगले पहुंचे जहां शाह अपने बंगले से निकल रहे थे। इसी दौरान इन शिक्षकों ने परिवीक्षा अवधि वाले शिक्षकों को स्थानांतरण हेतू आवेदन का अवसर दिए जाने की मांग की। इस पर शाह ने साफ कह दिया कि जो नियम में होगा वही होगा। इसके बाद ये शिक्षक सीएम हाउस भी पहुंचे ताकि अपनी परेशानियों से उन्हें अवगत करा सकें। लेकिन यहां मौजूद स्टाफ ने इन शिक्षकों को ये कहकर रवाना कर दिया कि सीएम साहब व्यस्त हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि यदि सीएम साहब उनसे मिल लेते और मांगे सुन लेते तो ही उनको तसल्ली हो जाती। सीएम और विभागीय मंत्री की बेरुखी से इन नवनियुक्त शिक्षकों को हताशा हुई है।

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