

मुंबई, 18 जनवरी 2026: पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड ने आज पराग पारिख लार्ज कैप फंड के न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) की शुरुआत की। यह एनएफ़ओ 30 जनवरी 2026 को बंद होगा, जबकि योजना 6 फ़रवरी 2026 से दोबारा निवेश के लिए खुलेगी। यह फंड हाउस की स्थापना के बाद पेश की गई सातवीं योजना है।
यह योजना निवेशकों को कम लागत में, व्यापक लार्ज-कैप एक्सपोज़र उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है। इसके तहत ऐसी निवेश रणनीति अपनाई जाएगी जिससे ट्रेडिंग और इम्पैक्ट लागत को नियंत्रित किया जा सके और समय के साथ पोर्टफोलियो को इसके बेंचमार्क के क़रीब रखा जा सके। योजना में कुशल निवेश साधनों का उपयोग करते हुए एक्टिव शेयर को सीमित रखा जाएगा।
इस योजना में न्यूनतम निवेश राशि 1,000 रूपये होगी और उसके बाद 1 रूपये के गुणकों में निवेश किया जा सकेगा। योजना में कोई एंट्री या एग्ज़िट लोड नहीं होगा। डायरेक्ट और रेगुलर—दोनों योजनाओं में ग्रोथ तथा इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉल विकल्प उपलब्ध होंगे।
पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड के चेयरमैन एवं सीईओ नील पराग पारिख ने कहा, “कई निवेशक पारदर्शी, कम लागत और स्थिर लार्ज-कैप निवेश के अवसर की तलाश में रहते हैं। यह फंड इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लॉन्च किया गया है, जिसमें स्मार्ट निष्पादन और लागत दक्षता पर ज़ोर दिया गया है, जिसका लाभ सीधे निवेशकों तक पहुँचेगा।”
इस योजना का प्रबंधन राजीव ठक्कर, रौनक ओंकार, राज मेहता, रुकुन ताराचंदानी, तेजस सोमन और ऐश्वर्या धर द्वारा किया जाएगा।
पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड के ईवीपी एवं फंड मैनेजर रुकुन ताराचंदानी ने बताया कि यह योजना लागत-कुशल तरीके से निवेश के लिए निम्न रणनीतियाँ अपना सकती है:
• डिस्काउंट पर सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स: जब किसी शेयर का नज़दीकी महीने का फ्यूचर उसके मौजूदा (स्पॉट) भाव से कम दाम पर मिल रहा हो, तो तय नियमों और सीमाओं के भीतर ऐसे फ्यूचर्स के ज़रिये निवेश किया जा सकता है, जिससे लागत के लिहाज़ से बेहतर फायदा मिलता है।
• डिस्काउंट पर इंडेक्स फ्यूचर्स: अगर इंडेक्स फ्यूचर्स, इंडेक्स के मौजूदा स्तर से नीचे ट्रेड कर रहे हों, तो बेहतर एक्सपोज़र पाने के लिए इन फ्यूचर्स का उपयोग किया जा सकता है।
• मर्जर से जुड़ा आर्बिट्राज: जब किसी इंडेक्स की कंपनी का किसी दूसरी कंपनी के साथ विलय हो रहा हो, तो घोषित मर्जर अनुपात के मुकाबले कम दाम पर उपलब्ध शेयरों में, तय अनुमेय सीमाओं के भीतर, निवेश का अवसर मिल सकता है।
• स्मार्ट री-बैलेंसिंग: निफ़्टी 100 के शेयरों में बदलाव होने पर, इंडेक्स की तय तारीख पर एक साथ बदलाव करने के बजाय, बेहतर निष्पादन के लिए धीरे-धीरे और चरणों में री-बैलेंसिंग की जा सकती है।
• सीमित अवसरवादी एक्टिव शेयर: डीमर्जर या अन्य विशेष कॉर्पोरेट घटनाओं के समय, तरलता और लागत पर नियंत्रण रखने के लिए निवेश में धीरे-धीरे प्रवेश और निकास किया जा सकता है। ऐसे एक्टिव शेयरों का कुल हिस्सा 10 प्रतिशत से कम रखने का लक्ष्य रहेगा।
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