खबरमध्य प्रदेश

काली श्रम संहिताओं के खिलाफ समूचे प्रदेश में हुए प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम केंद्र व राज्य के श्रम कार्यालयों में सौंपे ज्ञापन

भोपाल/ 16 दिसम्बर 2025’देश के 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों तथा 20 से अधिक औद्योगिक फेडरेशन/ एसोसिएशनों के प्रदेश स्तरीय संयुक्त मोर्चे के आव्हान पर आज समूचे प्रदेश में काली श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग पर केंद्र व राज्य के श्रम कार्यालयों के समक्ष संयुक्त प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन पश्चात महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपें गये।
इस मौके पर जबलपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त(केन्द्रीय), भोपाल स्थित क्षेत्रीय श्रमायुक्त(केन्द्रीय), इंदौर स्थित प्रदेश श्रमायुक्त के अलावा भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना, गुना, उज्जैन, मुरैना, भिंड, रतलाम, सागर, सिंगरौली, अनूपपुर, सीधी, छिंदवाड़ा, बैतूल, नीमच, सीधी, मैहर, बालाघाट, मंडीदीप, पीथमपुर, देवास आदि नगरों व औद्योगिक केंद्रों के श्रम कार्यालयों पर श्रमिकों ने संयुक्त प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपें।
ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश की विज्ञप्ति के जरिए मोर्चा के नेतागण- इंटक के राज्य अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव, एटक राज्य महासचिव एस.एस. मौर्या, सीटू राज्य महासचिव प्रमोद प्रधान, एचएमएस राज्य महासचिव नवीन लिटोरिया, एआईयूटीयूसी राज्य महासचिव रूपेश जैन, सेवा राज्य अध्यक्ष कविता मालवीय, केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति महासचिव यशवंत पुरोहित, मध्यप्रदेश बैंक एम्प एसोसिएशन महासचिव व्ही. के. शर्मा, सेंट्रल ज़ोन इंश्योरेंस एम्प एसोसिएशन अध्यक्ष अजीत केतकर, बीएसएनएल एम्प एसोसिएशन महासचिव बी.एस. रघुवंशी प्रमुख ने केंद्र सरकार द्वारा बगैर श्रमिक संगठनों से चर्चा कर एकतरफा रूप से 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार काली श्रम संहिताओं के द्वारा श्रमिकों के अधिकार छीनकर पूँजीपतियों व कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने के कदम की घोर निंदा की। नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार पूरी तरह धन्ना सेठों को फायदा पहुंचाने पर आमादा है और इसलिए देश की संपदा, सार्वजनिक उद्योगों, रेल, भेल, रक्षा जैसे उद्यमों, बैंक व बीमा जैसे वित्तीय संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने का घृणित प्रयास कर रही है। इसके खिलाफ मजदूर वर्ग के आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से यह काली श्रम संहिताएं लाई गयी है। संगठनों ने अपने ज्ञापन के जरिए महामहिम राष्ट्रपति महोदय से उम्मीद की है कि वे भारत के संविधान में दिए गए न्याय और बराबरी के हक में हमारे ज्ञापन पर त्वरित विचार करेंगे तथा अपने अधिकार का उपयोग करते हुए इन चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की हमारी मांग समेत उपरोक्त सभी मांगों को स्वीकारने के लिए सरकार को निर्देशित करेंगे।
ज्ञापन की मांगों में काली श्रम संहिताओं के खात्मे, सभी श्रमिकों के लिए रु. 26,000/- प्रति माह का राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, सभी श्रेणियों के कामगारों के लिए न्यूनतम पेंशन रु 9,000/- प्रतिमाह, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों, बैंक, बीमा के निजीकरण पर रोक, आउटसोर्स, निश्चित अवधि का रोजगार, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षु आदि पर रोक, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण, किसानों को एमएसपी की गारंटी आदि शामिल है।

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