अध्यात्ममध्य प्रदेश

ब्रह्मा- बिष्णु के बीच हुई लड़ाई के फलस्वरूप प्रकट हुआ स्तम्भ लिंग:पं०सुशील

(स्तम्भ लिंग में दिखा प्रणवाक्षर ऊं)

भोपाल 21 जुलाई.श्री शिव शक्ति धाम सिद्धाश्रम निपानिया जाट में आज श्री शिव महापुराण की कथा का शुभारंभ हुआ ।कथावाचक पं०सुशील महाराज ने श्रोताओं को ब्रह्मा, बिष्णु एवं शंकर की उत्पत्ति की कथा सुनाते हुये बताया है।कि आदि शिव की इच्छा से श्री बिष्णु भगवान की उत्पत्ति हुई ।श्री शिव की इच्छा से श्री बिष्णु की कमल नाभ से श्री ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई।लेकिन छोटे-बडे होने की बात को लेकर दोनों के बीच लडाई छिड गई।तब आदि शिव दोनों के बिच स्तम्भ लिंग (ज्योतिर्लिंग) के रूप में विशाल रूप में प्रगट हो गये।तब ब्रह्मा एवं बिष्णु आश्चर्य चकित होकर उनसे अधिक शक्तिशाली इस शक्ति कि खोज करने निकल पडे।ब्रह्मा हंस बाहन पर आकाश लोक को गये।और श्री बिष्णु पाताल लोक को खोज करने गये।एक हजार बर्ष गुजरने के बाद शिवलिंग का छोर उन दोनों को नहीं मिला तब ब्रह्मा ने केतकी के फूल को शिवलिंग का का छोर बता दिया। ब्रह्मा के इस झूंठ से क्रोधित होकर आदि शिव ने अपने जटा से बिरभद्र को उत्पन्न करके आदेश दिया । कि ब्रह्मा ने जिस मुख से झूंठ वोला है।उस मुख को काट दो।बिरभद्र ने ब्रह्मा के उस मुख को कृपांण से काट दिया।श्री बिष्णु की स्तुति पर आदि शिव ने ब्रह्मा को जिवत छोड दिया।ब्रह्मा को श्रृष्टि कि रचना रचने का काम,श्री बिष्णु को श्रृष्टि का पालन करने का काम एवं ब्रह्मा के शीष से प्रकट शंकर जि श्रृष्टि संहार का काम सौप दिया । बिशेष ज्ञान: –श्री शिव महापुराण के प्रमाण के अनुसार इस संशार में सबसे पहले “ऊ” उसके बाद “नम:शिवाय ” मंत्र कि उत्पत्ति हुई है।अत:शिवलिंग पूजा में शिवलिंग के ऊपर “ऊं” लिखने से एवं जपने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । बेलपत्र पर विशेष मंत्र लिखने से बिशेष फल प्राप्ति होती है। बेलपत्र में तिन पत्ति होती हैं । अष्टगंध,चंदन से ऊपर कि पत्ति पर ऊ लिखें एवं नीचे कि वायिं साइड पत्ति पर नम:लिखें दाईं साइड कि पत्ति पर शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढाने से शिव पूजा का पूर्ण लाभ मिलता है। एवं शिव कि बिशेष कृपा प्राप्त होती है। कथा दण्डी स्वामी के सानिध्य में संपन्न हुई ।पं०लोचन शास्त्री जी ने पार्थिव शिवलिंग पूजन करवाये।नागा महाराज श्रि केशवदास जि ने श्रीशिव महापुराण कि आरति उतारि है।
(पं०सुशील)

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