तेजप्रताप ने खाली किया बंगला, मंत्री का आरोप- पंखा-कुर्सी से लेकर बल्ब-AC तक गायब, छत टूटी, खंडहर बन गया सरकारी आवास
तेजप्रताप यादव ने सरकारी आवास खाली कर दिया है. जिसके बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है. यह आवास मंत्री लखेंद्र पासवान को आवंटित किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगले से सभी सामान गायब हैं. बल्ब-AC और पंखे तक खोल लिए गए हैं.


तेजप्रताप यादव ने पटना का सरकारी आवास खाली कर दिया है. उसके बाद अब यह मामला नए राजनीतिक विवाद में बदल गया है. 26 एम स्ट्रैंड रोड स्थित यह बंगला अब बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान को अलॉट हुआ है. लेकिन बंगले में कदम रखते ही उन्होंने जो हाल देखा, उसने कई सवाल खड़े कर दिए.
मंत्री लखेंद्र पासवान का आरोप है कि सरकारी आवास से फर्नीचर और जरूरी सामान गायब है. उन्होंने बताया कि बंगले में पंखे नहीं हैं. कुर्सियां नहीं हैं. एसी तक उखाड़ लिए गए हैं. बल्ब भी नहीं बचे हैं. यहां तक कि गेट के लैच भी टूटे हुए हैं. मंत्री का कहना है कि सरकारी आवास इस तरह खाली नहीं किया जाता. हर मंत्री और विधायक को रहने लायक घर दिया जाता है. खंडहर नहीं.
मंत्री लखेंद्र पासवान ने क्या कहा?
लखेंद्र पासवान ने कहा कि बंगले की हालत इतनी खराब है कि फिलहाल उसमें रहना संभव नहीं है. छत भी क्षतिग्रस्त है. मरम्मत कराए बिना आवास में शिफ्ट होना मुश्किल है. उन्होंने पूरे मामले की जानकारी भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों को दे दी है और बंगले की स्थिति भी उन्हें दिखाई है.
बंगले में रखा फर्नीचर यहां किया गया है शिफ्ट
तेजप्रताप यादव ने यह सरकारी आवास खाली कर दिया है. बताया जा रहा है कि बंगले में रखा फर्नीचर और अन्य सामान अनीसाबाद रोड स्थित LR भारत के नाम से चल रहे ऑफिस में शिफ्ट किया गया है. हालांकि इस पर तेजप्रताप की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
तेजप्रताप ने इसी आवास में आयोजित किया था भोज
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी और परिवार से अलग होने के बाद तेजप्रताप यादव ने इसी आवास में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था. इस कार्यक्रम में उनके पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल हुए थे. उस दौरान लालू यादव ने कहा था कि बेटे से कोई नाराजगी नहीं है. इसके बाद तेजप्रताप की परिवार में वापसी की अटकलें तेज हो गई थीं.
तेजप्रताप यादव को यह आवास 25 नवंबर 2025 को खाली करने का नोटिस मिला था. महुआ विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद भवन निर्माण विभाग ने नोटिस जारी किया था. नियमों के मुताबिक, पूर्व विधायक को एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है



