आचार्य शंकर न्यास द्वारा 86 वीं शंकर व्याख्यानमाला आज


भोपाल। उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धान्त को साधारण जनमानस तक पहुँचाने वाले आचार्य शंकर की परम्परा को अक्षुण्ण रखने के लिये आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा पिछले 6 वर्षों से प्रतिमाह निरंतर शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाता है। दिसंबर माह में न्यास द्वारा आज 86 वीं व्याख्यानमाला का आयोजन प्रातः 9 बजे से ऑनलाइन किया जाएगा, जिसमें मार्कंडेय संन्यास आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ‘ईशावास्यमिदं सर्वं‘ विषय पर व्याख्यान देंगे, जिसे श्रोता एकात्म धाम के यूट्यूब लाइव से ऑनलाइन जुड़कर व्याख्यान को सुन सकते है।
स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) स्थित श्री मार्कंडेय संन्यास आश्रम के परमाध्यक्ष हैं। वें नेपाल मूल के प्रतिष्ठित संन्यासी हैं एवं अद्वैत वेदांत के गहन विद्वान माने जाते हैं। युवावस्था में ही काशी में स्वामी रामानंद सरस्वती जी से संन्यास दीक्षा प्राप्त की। दीक्षा के पश्चात अपने गुरु के साथ ओंकारेश्वर आए, जहाँ नर्मदा तट पर रहकर उपनिषद, ब्रह्मसूत्र एवं शंकराचार्य कृत ग्रंथों का गहन अध्ययन किया।
स्वामी जी के नेतृत्व में श्री मार्कंडेय संन्यास आश्रम, साधकों और जिज्ञासुओं के लिए वेदांत का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जिसकी शाखाएँ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और काशी में भी हैं। स्वामी जी अद्वैत वेदांत दर्शन का समाज में सरल और तार्किक ढंग से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वर्ष 2014 में आपको ‘आदि शंकराचार्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
आपके प्रवचनों के मुख्य विषय विवेक चूड़ामणि, भज गोविंदम, साधना पंचकम एवं प्रस्थानत्रयी हैं। आप स्वाध्याय, सत्संग और मौन को जीवन का अनिवार्य साधन मानते हैं। ‘एकात्म पर्व’, ‘अद्वैतामृतम’ तथा एकात्म धाम परियोजना के माध्यम से वे ओंकारेश्वर को वैश्विक अद्वैत केंद्र के रूप में विकसित करने में आप सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ज्ञात हो कि प्रति माह शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन नियमित किया जाता है, जिसमें अद्वैत परम्परा के ही एक संन्यासी द्वारा गूढ वैदान्तिक विषय पर प्रकाश डाला जाता है। व्याख्यानमाला ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यमों से आयोजित की जाती है, जिसमें वेदांतिक रुचि रखने वाले प्रदेश व देश के जिज्ञासु श्रोता सम्मिलित होते हैं। न्यास द्वारा पिछले 6 वर्षों से अधिक समय से निरंतर विविध विषयों पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से देशभर के लाखों श्रोता जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त न्यास द्वारा ओमकारेश्वर में एकात्मता का वैश्विक केंद्र – ‘एकात्म धाम’ विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य जी की ‘एकात्मता की प्रतिमा’ मान्धाता पर्वत पर स्थापित की गई। इससे अतिरिक्त अद्वैत लोक – संग्रहालय तथा आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की भी स्थापना की जा रही है।



