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जहाँ विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहाँ धर्म की होती है जय-जयकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दादा गुरु के प्रकटोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार देर शाम माँ नर्मदा के तट सरस्वती घाट पर आयोजित दादा गुरु के प्रकटोत्सव पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में शामिल हुए। विदेश (दावोस) से लौटने के बाद दादा गुरु के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, विधायक श्री अशोक रोहाणी, श्री रत्नेश सोनकर एवं श्री राजकुमार पटेल एवं बड़ी संख्या में नर्मदा परिक्रमावासी मौजूद थे।

​विज्ञान से परे है आस्था की शक्ति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि हम सब सनातन संस्कृति के संवाहक हैं। कई बार जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हमें आश्चर्य होता है, जहाँ विज्ञान के नियम काम करना बंद कर देते हैं या फेल हो जाते हैं, वहीं से धर्म की जय-जयकार शुरू होती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रकृति के नियमों को समझने का प्रयास करता है, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है जिससे हमें आनंद और साहस  प्राप्त होता है।

​विशाल जनसमूह माँ नर्मदा की कृपा का प्रमाण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा परिक्रमावासियों के इतने बड़े दल और परिवार का सुचारू रूप से चलना, बिना माँ नर्मदा और दादा गुरु की कृपा के संभव नहीं है। यह विशाल जनसमूह इसका प्रमाण है।

​दादा गुरू के दर्शन की लालसा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी व्यस्तता और दादा गुरु के प्रति समर्पण का जिक्र करते हुए बताया कि हेलीकॉप्टर के पायलट ने चेतावनी के बाद भी यदि समय पर वापस नहीं आए तो कल दोपहर 2 बजे तक रुकना पड़ेगा। उन्होंने मुझे दादा गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर से अपने लगाव का भी जिक्र करते हुए बताया कि जबलपुर पर माँ नर्मदा की विशेष कृपा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में बाबा महाकाल और माँ नर्मदा से प्रार्थना की कि प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे और किसी के जीवन में कोई कष्ट न आए। संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह के साथ “नर्मदा महारानी की जय”, “बाबा महाकाल की जय” और “दादा गुरु भगवान की जय” के उद्घोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गाया भजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दादा गुरु के प्रकटोत्सव के कार्यक्रम में अलग अंदाज भी दिखाई दिया। उन्होंने पूरे श्रद्धाभाव से “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, राधा रमण हरि गोपाल बोलो” भजन गाकर नर्मदा परिक्रमावासियों को ऊर्जा से भर दिया।

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