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ज़ूनो स्मार्टड्राइव ने 1 करोड़ किलोमीटर और 1.5 लाख ट्रिप का आंकड़ा पार किया, युवा भारत की पसंद बना उपयोग पर आधारित कार इंश्योरेंस

मुंबई, 21 दिसंबर, 2025: ज़ूनो जनरल इंश्योरेंस नए जमाने की डिजिटल बीमा कंपनी है, जो बीमा को आसान, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के संकल्प पर कायम है। कंपनी ने आज अपने ऐप-आधारित कार इंश्योरेंस ‘जु़नो स्मार्टड्राइव’ की बढ़ती लोकप्रियता से जुड़ी जानकारी साझा की, जो यूसेज-बेस्ड कार इंश्योरेंस (UBI) की सुविधा प्रदान करने वाला ऐप है जिसे मार्च 2025 में लॉन्च किया गया था। नौ महीनों से भी कम समय में, जु़नो स्मार्टड्राइव के यूजर्स के 1 करोड़ किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने की उपलब्धि से यह संकेत मिलता है कि, भारत की नई पीढ़ी के वाहन चालकों के बीच अब अपनी ड्राइविंग की आदतों के अनुसार मिलने वाले पर्सनल इंश्योरेंस की लोकप्रियता बढ़ रही है।
ज़ूनो ने UBI का फ़ायदा ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए अपनी प्रमुख पहल, ज़ूनो ड्राइविंग कोशेंट (ZDQ) चैलेंज को अब उन लोगों के लिए भी शुरू किया है जो ज़ूनो के ग्राहक नहीं हैं। 5 दिनों के इस फ़्री ट्रायल में, ग्राहक बस ज़ूनो ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, 5 दिनों के दौरान अपनी ड्राइविंग का मूल्यांकन कर सकते हैं, साथ ही बिना किसी शुल्क के पर्सनलाइज़्ड ड्राइविंग स्कोर प्राप्त कर सकते हैं। इस स्कोर के जरिए ग्राहकों को कार इंश्योरेंस पर अतिरिक्त छूट और गिफ्ट वाउचर पाने का अवसर मिलता है। इस तरह, ज़ूनो देश की पहली ऐसी बीमा कंपनी बन गई है जो बड़े पैमाने पर ऐप के जरिए इंश्योरेंस खरीदने से पहले ही ड्राइविंग टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराती है, जिससे ग्राहकों को सही मायने में बड़ा आर्थिक फायदा मिलता है।
यह सुविधा उपयोग पर आधारित इंश्योरेंस को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि अब युवा भारत में अपनी ड्राइविंग की आदतों के अनुसार मिलने वाले पर्सनल मोटर इंश्योरेंस की लोकप्रियता बढ़ रही है।
ज़ूनो स्मार्टड्राइव को मार्च 2025 में लॉन्च किया गया था, जिसने देश भर में डिजिटल को ज्यादा अहमियत देने वाले ड्राइवरों के साथ पहले ही 1.5 लाख से ज़्यादा ट्रिप दर्ज की है, जिनका औसत स्कोर 92% रहा है। इस पहल में सबसे ज्यादा हिस्सा 28 से 40 साल के लोगों ने लिया है, जिससे पता चलता है कि भारत के गतिशील और टेक्नोलॉजी को पसंद करने वाले युवाओं को यह बेहद पसंद आ रहा है।
ज़ूनो का टेलीमैटिक्स पर आधारित मॉडल यह भी दिखाता है कि, ड्राइविंग की आदतें ही जोखिम के अंदाजा लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है, जिसमें इलाका या कार का प्रकार खास मायने नहीं रखते। देश के हर क्षेत्र में, लगातार स्कोर कम होने की वजह ड्राइविंग से जुड़ी दो आदतें हैं, यानी बार-बार तेज़ी से ब्रेक लगाना और तेज़ी से गाड़ी की रफ़्तार बढ़ाना। ड्राइविंग की ये आदतें ही ट्रिप की गुणवत्ता और भविष्य के जोखिम के सबसे मजबूत संकेत के तौर पर सामने आए हैं, फिर चाहे ड्राइवर कहीं भी रहता हो या गाड़ी चलाता हो।
सबसे चौंकाने वाले परिणामों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
• मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में औसत ड्राइविंग स्कोर 91% रहा। ऐसा शायद सड़कों पर भीड़-भाड़, व्यस्त समय के दौरान बहुत अधिक वाहनों की मौजूदगी और अस्त-व्यस्त ट्रैफ़िक की वजह से हो सकता है।
• जम्मू और कश्मीर, पंजाब और तमिलनाडु भारत के सबसे सुरक्षित ड्राइविंग वाले राज्यों के तौर पर उभरकर सामने आए हैं, जहाँ लगातार ब्रेक लगाने और तेज़ी से रफ़्तार बढ़ाने का दर कम है, और इनमें से प्रत्येक राज्य का औसत ड्राइविंग स्कोर 92% से ज़्यादा है।
• पुणे और कोलकाता में तेज़ रफ़्तार के मामले ज़्यादा देखे गए, जबकि गुंटूर और विजयनगरम में अचानक ब्रेक लगाने के मामले सबसे ज़्यादा सामने आए।
इन नतीजों परिणामों से पता चलता है कि, असल दुनिया के ड्राइविंग माहौल अलग-अलग इलाकों में कैसे ड्राइवरों की आदतों को प्रभावित करते हैं।
इस बारे में बात करते हुए ज़ूनो जनरल इंश्योरेंस की एमडी एवं सीईओ, शनाई घोष ने कहा, “हम स्मार्टड्राइव के जरिए लोगों को निष्पक्ष, पारदर्शी और पर्सनलाइज़्ड इंश्योरेंस का अनुभव देना चाहते हैं, जो सही मायने में आज के युवा भारत की ड्राइविंग के तरीकों पर आधारित हो। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि युवा भारत अब अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और ज़्यादा समझदारी से ड्राइविंग कर रहा है, जिसके लिए उन्हें शानदार रिवॉर्ड भी मिल रहे हैं। अब हमारा पूरा ध्यान एक आसान, ज़्यादा सहज और फायदेमंद इकोसिस्टम बनाने पर है, जहाँ बेहतर ड्राइविंग करने वालों को आखिरकार वे फायदे मिलें जिनके वे सच में हकदार हैं, और इस तरह भारत की सड़कें ज़्यादा सुरक्षित बनें।”
भारत के सड़क सुरक्षा संकट के कम होने की संभावना अभी कम ही दिखाई दे रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी 2024 के अनंतिम आंकड़े बताते हैं कि, इस साल के दौरान देश में 4.7 लाख से ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं और 1.7 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गईं, जो भारतीय सड़कों पर खतरा लगातार बरकरार रहने का संकेत है। कुछ राज्यों ने अभी तक डेटा साझा नहीं किया है, जिसके बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा अंतिम आंकड़े जारी किए जाएंगे। कुछ राज्यों में धीरे-धीरे सुधार तो हुआ है, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही से गाड़ी चलाना, तेज़ रफ़्तार, तथा हेलमेट और सीट बेल्ट का कम इस्तेमाल जानलेवा दुर्घटनाओं के मुख्य कारण बने हुए हैं।
2023 के MoRTH के अंतिम आंकड़े भी इसी गंभीर समस्या की पुष्टि करते हैं, जिसके अनुसार पूरे देश में 4.81 लाख सड़क हादसे हुए, जिनमें 1.73 लाख लोगों की जान गई और 4.6 लाख से ज़्यादा लोग घायल हुए; इसका मतलब है कि हर घंटे लगभग 20 मौतें और 55 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कुल मिलाकर, ये आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि अब दुर्घटना के बाद सुरक्षा के उपायों तक सीमित रहने के बजाय, हमें तकनीक के ज़रिए सड़क हादसों को रोकने वाले समाधानों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
ज़ूनो में हमने भारत को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रोत्साहित करने को अपना मिशन बनाया है। ज़ूनो का स्मार्ट-ड्राइव ऐप ग्राहकों को उनकी ड्राइविंग की गुणवत्ता के बारे में तुरंत फीडबैक देता है और उन्हें सुरक्षित ड्राइविंग की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
ज़ूनो की टेलीमैटिक्स से मिली अहम जानकारी ड्राइविंग के खतरों से जुड़े कुछ खास ट्रेंड्स को भी दिखाती हैं:
• 96 से 100 के बीच बेहतरीन स्कोर वाले ड्राइवरों में क्लेम का जोखिम 40% कम देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि संयम और अनुशासित ड्राइविंग से सीधे तौर पर सड़क हादसों में कमी आती है।
• ये आंकड़े कुछ आम धारणाओं को भी गलत साबित करते हैं। ड्राइविंग की सुरक्षा का लिंग से लगभग कोई लेना-देना नहीं होता है। महिलाओं का औसत स्कोर 92.83% रहा, जो पुरुषों के 92.81% से थोड़ा ही अधिक है; इससे जाहिर है कि सड़क पर दोनों समूहों के लिए जोखिम का स्तर लगभग एक समान है।
• ड्राइवर किस समय अपनी ट्रिप करते हैं, यह भी काफी मायने रखता है। सामान्य तौर पर हफ़्ते के कामकाजी दिनों में दिन के वक्त ड्राइविंग के दौरान बेहतरीन स्कोर (80-100) अधिक देखा जाता है, जिससे यह साफ होता है कि रात के समय सफर करना वाकई ज़्यादा जोखिम भरा है। दिन के वक्त व्यवस्थित और सुनियोजित तरीके से की जाने वाली यात्राएँ ज़्यादा बेहतर होती हैं, जिससे सड़क पर सुरक्षा बनी रहती है।
• अलग-अलग इलाकों और विभिन्न प्रकार की गाड़ियों के बीच, ये दो आदतें ऐसी हैं जो कम स्कोर और ज़्यादा जोखिम के सबसे मज़बूत संकेत हैं:
• बार-बार ज़ोरदार ब्रेक लगाना, और बहुत तेज़ी से गाड़ी की रफ़्तार बढ़ाना। कोई व्यक्ति कहीं भी गाड़ी चलाए, ये दोनों आदतें हमेशा इस बात का इशारा करती हैं कि सफर खतरे से भरा है।
• बदलते मौसम के आंकड़े से भी एक बड़ी बात सामने आती है। बारिश होने पर भी सुरक्षित ड्राइविंग करने वाले लोग अपनी सावधानी नहीं छोड़ते। ज़्यादा स्कोर (80–100) प्राप्त करने वाले लोग गर्मी और मॉनसून दोनों मौसमों में एक जैसा शानदार प्रदर्शन बनाए रखते हैं, जिससे जाहिर है कि मौसम के बदलाव का उनकी सुरक्षित ड्राइविंग की आदतों पर कोई असर नहीं पड़ता।
ज़ूनो स्मार्टड्राइव कार इंश्योरेंस में भारत का पहला रियल-टाइम क्रैश डिटेक्शन फीचर भी शामिल है। यह अपने आप ही किसी दुर्घटना का पता लगाने के लिए एडवांस्ड मोबाइल टेलीमैटिक्स का इस्तेमाल करता है और ज़ूनो की सपोर्ट टीम को इसकी सूचना भेजता है। सूचना मिलने के बाद, टीम आपातकालीन मदद, सड़क किनारे सहायता और प्राथमिकता के आधार पर क्लेम की प्रक्रिया शुरू कर देती है, ताकि ग्राहक को फोन नहीं करना पड़े और उसे तुरंत समय पर सहायता मिल सके।

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