ग्राम गोरा में पुश्तैनी भूमि को लेकर विवाद, ब्रह्मा मारण ने निष्पक्ष जांच और सीमांकन की मांग उठाई

भोपाल। राजधानी भोपाल के वार्ड क्रमांक 26 अंतर्गत ग्राम गोरा में पुश्तैनी भूमि को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। ग्राम निवासी ब्रह्मा मारण ने आरोप लगाया है कि उनकी एवं उनके भाइयों की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, सीमांकन तथा राजस्व अभिलेखों की समीक्षा की मांग की है।
ब्रह्मा मारण का कहना है कि मध्यप्रदेश के कम्प्यूटरीकृत भू-अभिलेखों में खसरा नंबर 209/1, 251/2, 286/209 एवं 292/253/3 की भूमि पर उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार स्वर्गीय नन्नूलाल मारण के उत्तराधिकारियों के रूप में मखमल सिंह मारण, होतम सिंह मारण, सर्जन सिंह मारण, विष्णु मारण एवं ब्रह्मा मारण का भूमि में समान हिस्सा दर्ज है।
किसान ब्रह्मा मारण ने आरोप लगाया है कि प्रमोद कुमार दुबे, प्रमोद शर्मा, भवानी सिंह रावत, गब्बर मारण, राजेश जैन (पूर्व पटवारी) तथा योगेश पारे (पूर्व आरआई) की कथित मिलीभगत से उनकी एवं उनके भाइयों की भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। उनका आरोप है कि पूर्व में की गई कुछ राजस्व प्रविष्टियों एवं बंटांकन संबंधी कार्रवाई में अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण वर्तमान विवाद खड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ब्रह्मा मारण ने यह भी आरोप लगाया कि प्रमोद कुमार दुबे, भवानी सिंह रावत एवं प्रमोद शर्मा द्वारा उनके और उनके परिवार के विरुद्ध कथित रूप से झूठी शिकायतें की जा रही हैं, जिससे पूरे परिवार पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच के बजाय एकतरफा कार्रवाई का वातावरण बनाया जा रहा है।
किसान का यह भी आरोप है कि हाल ही में वर्तमान आरआई, पटवारी एवं पुलिस बल मौके पर पहुंचे थे। ब्रह्मा मारण के अनुसार, एसडीएम द्वारा केवल स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे, जबकि मौके पर बिना किसी सीमांकन आदेश के कब्जा दिलाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि जब तक भूमि का विधिवत सीमांकन नहीं हो जाता और सभी राजस्व अभिलेखों की जांच नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष के पक्ष में कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
ब्रह्मा मारण के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय, राजस्व विभाग एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें सौंपी हैं। उनका कहना है कि सबसे पहले विवादित भूमि का सीमांकन कराया जाए तथा राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें और उनके परिवार को उनकी पूरी भूमि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि सीमांकन में दूसरे पक्ष का दावा सही पाया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन बिना सीमांकन के किसी भी प्रकार की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं होगी।
ब्रह्मा मारण ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि से जुड़े सभी दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड, बंटांकन प्रक्रिया तथा मौके पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि लंबे समय से चल रहे विवाद का न्यायसंगत समाधान निकल सके।



