टीईटी परीक्षा में रखी गईं हैं अनेक विसंगतियां -हीरानंद नरवरिया
बहुत गंभीर है टीईटी वाला मुद्दा

भोपाल। शिक्षकों के लिए टीईटी वाला मुद्दा बहुत गंभीर है।
टीईटी परीक्षा में जानबूझकर विसंगतिया रखी गयीं हैं। शिक्षकों के संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हीरानंद नरवरिया के मुताबिक ये हैं प्रमुख विसंगतियां –
*1.* विषयवार परीक्षा पाठ्यक्रम में भारी विसंगति है।
*2.* सामाजिक विज्ञान का पाठ्यक्रम बहुत lengthy है।
*3.* गणित में त्रिकोणमिति और विज्ञान के 5 यूनिट जोड़ना गैर-जरूरी है। गणित शिक्षक से गणित + विज्ञान की परीक्षा लेना भेदभाव है।
*4.* अन्य विषयों का पाठ्यक्रम गणित और सामाजिक विज्ञान की तुलना में अत्यंत सीमित है – समानता का उल्लंघन।
*5.* RTE के तहत कक्षा 6-8 में गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी के पद हैं। अगर गणित के साथ विज्ञान जोड़ा है तो अंग्रेजी के साथ हिंदी-संस्कृत क्यों नहीं? ये सीधा भेदभाव है।
*6.* 30-32 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों से कंप्यूटर आधारित परीक्षा लेना आपत्तिजनक है।
*7.* सेवारत शिक्षकों से फीस लेना अवैध है, क्योंकि ये परीक्षा प्रमोशन के लिए नहीं, सेवा से पृथक करने के लिए ली जा रही है।
*8.* पाठ्यक्रम, पद्धति और पासिंग मानक – तीनों आपत्तिजनक और अवैध हैं।
*9.* सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन हो, पर अपनी मनमानी व्याख्या से नहीं।
*10.* भर्ती नियम 1982 अभी भी प्रचलित है। TET की वर्तमान पद्धति से सारे भर्ती नियम ध्वस्त हो जाएंगे। अगर नियम चलन में है तो सभी उच्च श्रेणी शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर व्याख्याता/प्राचार्य पद पर भूतलक्षी पदोन्नति दी जाए।

