खबरराजनीतिक

SIR को डिस्टर्ब करने की अनुमति किसी को नहीं, ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों ने राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किये. डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ओर से SIR को रोकने की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को काफी सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि हम किसी को भी एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे. राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए. बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया चल रही है.

ममता बनर्जी समेत अन्य की याचिकाओं पर हुई सुनवाई

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में जरूरी आदेश या स्पष्टीकरण जारी करेगी. पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. इनमें ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है. ममता बनर्जी ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से ‘बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने’ की आशंका जतायी थी.

याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की 3 सदस्यीय बेंच ने कहा- हम किसी को भी एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे. राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कुछ उपद्रवियों पर एसआईआर संबंधी नोटिस को जलाने का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.

सुप्रीम कोर्ट को निर्वाचन आयोग के वकील ने बताया कि एसआईआर नोटिस जलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है. केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है.

वोटर लिस्ट संसोधन में अंतिम फैसला वोटर लिस्ट बनाने वाले अधिकारी लेंगे

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से निर्वाचन आयोग को ग्रुप-बी के 8,505 अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराये जाने का भी संज्ञान लिया. कहा कि इन अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया में प्रशिक्षित और नियोजित किया जा सकता है. पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन के सिलसिले में अंतिम निर्णय हमेशा मतदाता सूची बनाने वाले अधिकारी ही लेंगे.

अफसरों की नियुक्ति और उनके कामकाज चुनाव आयोग तय करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इन 8,505 अधिकारियों की नियुक्ति का तरीका और कामकाज निर्वाचन आयोग तय करेगा. सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी के वकील श्याम दीवान ने एसआईआर प्रक्रिया में माईक्रो ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति और बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के नाम हटाये जाने को लेकर आशंकाएं व्यक्त कीं. उन्होंने कहा- हम नहीं चाहते कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जाएं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button