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मिडिल ईस्ट तनाव से गोल्ड में तेजी, एक्सपर्ट ने बताया अप्रैल के बाद इतना होगा सोने का भाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। बढ़ते तनाव के बीच निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। गुरुवार को सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह करीब 5,170 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।

दरअसल अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी मिसाइल हमलों से क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। यह टकराव अब छठे दिन में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया, जबकि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों को खारिज कर दिया है।

सोने पर दो तरफा दबाव

वेंचुरा के कमोडिटी हेड एन.एस. रामास्वामी के अनुसार इस समय सोने की कीमतों पर दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं। एक ओर भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मजबूत डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड जैसे आर्थिक कारक सोने की तेजी को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतिहास बताता है कि जब भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना अक्सर मजबूत बना रहता है, भले ही ब्याज दरें ऊंची क्यों न हों।

केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे सोने का भंडार

रामास्वामी के मुताबिक कई देशों के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने सोने के भंडार लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका में बढ़ता राजकोषीय घाटा भी लंबे समय में सोने की कीमतों को सहारा दे सकता है। उनका मानना है कि 5,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए मजबूत आधार बन सकता है।

अनुमान है कि आने वाले समय में सोना 5,100 से 5,200 डॉलर के दायरे में स्थिर रह सकता है और अप्रैल 2026 के बाद इसमें तेजी बढ़कर 5,600 डॉलर प्रति औंस से ऊपर तक जा सकती है। हालांकि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स पर नजर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ये दोनों कारक सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

तेल की तेजी से बढ़ी महंगाई की चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका फिर से मजबूत हो गई है। अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है, जो सोने की कीमतों पर दबाव बना सकती है।

चांदी में भी तेज उछाल

सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग का असर चांदी की कीमतों पर भी दिखा है। चांदी करीब 85 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई और इसमें लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई। केडिया एडवाइजरी के अनुसार कमजोर डॉलर और वैश्विक अनिश्चितता ने कीमती धातुओं की मांग को और मजबूत किया है।

टैरिफ के संकेत से बढ़ी बाजार की चिंता

इस बीच अमेरिका सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि जल्द ही 15 फीसदी का वैश्विक टैरिफ लागू किया जा सकता है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश निवेशकों के लिए आकर्षक बने रहेंगे।

2026 में भी चांदी बाजार में कमी संभव

केडिया एडवाइजरी के अनुसार वैश्विक चांदी बाजार में सप्लाई की कमी की स्थिति आगे भी बनी रह सकती है। अनुमान है कि 2026 में भी चांदी का बाजार लगातार छठे साल घाटे में रहेगा यानी मांग सप्लाई से अधिक बनी रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में चांदी की कमी करीब 6.7 करोड़ औंस रहने का अनुमान है।

औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग कुछ घटकर लगभग 650 मिलियन औंस रह सकती है। इसकी एक वजह सोलर पैनलों में चांदी के उपयोग में कमी को माना जा रहा है, हालांकि दुनिया भर में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार जारी है।

वहीं सप्लाई के मोर्चे पर चांदी की कुल आपूर्ति में करीब 1.5 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। खदानों से उत्पादन लगभग 1 फीसदी बढ़कर 820 मिलियन औंस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा ऊंची कीमतों के कारण रिसाइक्लिंग से मिलने वाली चांदी में करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है, क्योंकि ज्यादा कीमत मिलने पर स्क्रैप की आपूर्ति भी बढ़ जाती है। निवेशकों की दिलचस्पी भी चांदी में बनी हुई है और वैश्विक स्तर पर ईटीपी में चांदी की होल्डिंग करीब 1.31 अरब औंस रहने का अनुमान है।

इसी बीच 2026 में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 11 फीसदी की तेजी दर्ज की जा चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मांग मजबूत और सप्लाई सीमित बनी रहेगी, तब तक चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है।

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