प्रदेश में शिक्षकों की गुहार, राजस्थान की तरह ग्रीष्म अवकाश बढाये सरकार
भीषण गर्मी और जनगणना कार्य के चलते ग्रीष्मावकाश बढ़ाने की मांग

भोपाल। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और ग्रीष्म अवकाश अवधि में शिक्षकों की जनगणना कार्य मे संलग्नता को देखते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री से ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया है समग्र शिक्षक संघ ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र जारी मांग की है कि वर्तमान अवकाश अवधि को 30 मई 2026 से आगे बढ़ाकर 21 जून 2026 तक किया जाए और स्कूलों का सुचारू संचालन 22 जून 2026 से सुनिश्चित किया जाए।
संघ ने स्कूल शिक्षा मंत्री (म.प्र. शासन) को भेजे गए आधिकारिक पत्र में ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए निर्धारित अवकाश अवधि (1 मई से 30 मई) में प्रदेश के लगभग 90 फीसदी से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं भारत सरकार के अनिवार्य जनगणना कार्य में ड्यूटी पर तैनात हैं। इस राष्ट्रीय कार्य में लगातार व्यस्त रहने के कारण शिक्षक न तो मानसिक रूप से विश्राम कर पा रहे हैं और न ही आगामी सत्र की तैयारियों के लिए उन्हें समय मिल पा रहा है, जिससे ग्रीष्मावकाश का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है।
-45 से 48 डिग्री पहुंचा तापमान, बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा- संजय तिवारी
संगठन के महामंत्री संजय तिवारी ने प्रदेश में चल रही तीव्र हीटवेव (लू) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकांश जिलों में पारा 45^से 48^ के कष्टदायक स्तर को छू रहा है. ऐसी चिलचिलाती धूप में स्कूलों को खोलना छोटे बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण और जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए विभाग को गंभीरता से विचार करना होगा।
राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में होना चाहिए व्यवस्था- सुरेश दुबे-
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश दुबे ने इस मामले में
पड़ोसी राज्यों का हवाला दिया है। समग्र शिक्षक संघ ने पत्र में राजस्थान सरकार ने हाल ही में ग्रीष्मकल अवकाश वृद्धि का हवाला देते हुए जनहित, छात्रहित और शिक्षकहित में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है। इस पत्र की प्रतिलिपियां प्रमुख सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग) तथा आयुक्त (लोक शिक्षण संचालनालय ) को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई हैं।

