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सर्वोच्च न्यायालय ने टीईटी की अनिवार्यता को यथावत रखते हुए कार्यरत शिक्षकों को राहत स्वरूप टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी

टीईटी (TET) प्रकरण में  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आज दिए गए निर्णय के बाद मध्यप्रदेश के शिक्षकों के बीच विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आ रही हैं।इस संबंध में राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने शिक्षकों से धैर्य एवं एकजुटता बनाए रखने की अपील की है।मित्रों संघर्ष अभी समाप्त नहीं,बल्कि नए चरण में प्रवेश कर गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने टीईटी की अनिवार्यता को यथावत रखते हुए कार्यरत शिक्षकों को राहत स्वरूप टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है।यह राहत इस बात का प्रमाण है कि न्यायालय ने लाखों शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को गंभीरता से स्वीकार किया है।यद्यपि निर्णय शिक्षकों की मूल अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है,फिर भी यह अंतिम पड़ाव नहीं है।संगठन निर्णय का गहन अध्ययन कर रहा है तथा उपलब्ध सभी संवैधानिक एवं न्यायिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।आवश्यकता पड़ने पर क्यूरेटिव पिटिशन सहित अन्य वैधानिक उपाय अपनाए जाएंगे।मित्रों यह केवल नौकरी का प्रश्न नहीं,बल्कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और न्याय का विषय है। राज्य शिक्षक संघ शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए न्यायालयीन लड़ाई को पूरी मजबूती से आगे बढ़ाएगा।21 जून को देशभर के प्रभावित शिक्षकों के विभिन्न राज्यों के संगठनों,प्रतिनिधियों को साथ लेकर दिल्ली में मीटिंग कर संसद के समक्ष भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जाएगी तथा केंद्र सरकार से शिक्षकों के हित में आवश्यक विधायी एवं नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। में सभी शिक्षकों से आह्वान करता हूं कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह,भ्रम या निराशा का शिकार न हों। संगठन का प्रत्येक पदाधिकारी आपके साथ खड़ा है। संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन हम पीछे हटने वालों में नहीं हैं।”हमारा संकल्प स्पष्ट है—किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने देंगे।न्यायालय से लेकर जनआंदोलन तक,और आवश्यकता पड़ने पर संसद तक,शिक्षक हितों की यह लड़ाई पूरी शक्ति, एकता और प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगी।”सभी शिक्षक संयम,धैर्य और संगठनात्मक एकता बनाए रखें।इतिहास गवाह है कि संगठित संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।शिक्षक समाज निश्चिंत रहे, राज्य शिक्षक संघ आपके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए प्राण-प्रण से प्रतिबद्ध है।”साथियों, निर्णय आया है, लेकिन संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। न्यायालय ने समय-सीमा बढ़ाकर शिक्षकों की कठिनाइयों को स्वीकार किया है। अब आगे की न्यायालयीन एवं लोकतांत्रिक लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। कोई भी शिक्षक चिंतित न हो। राज्य शिक्षक संघ आपके साथ था, है और रहेगा। हमारा संकल्प है—किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने देंगे।”
– जगदीश यादव
प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश।

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