टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मैदान में उतरेगा मध्य प्रदेश शिक्षक संघ
18 जून को प्रदेशभर में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन

भोपाल। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद राज्य सहित देशभर के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। संघ ने घोषणा की है कि 18 जून 2026 को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
56 वर्षों से शिक्षक हित में कार्यरत है संगठन
मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, जो पिछले 56 वर्षों से शिक्षक, छात्र, शिक्षा और राष्ट्रहित में कार्य कर रहा है तथा शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संगठन है, ने भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। प्रेस वार्ता को संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता ने संबोधित किया।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर जताई चिंता
संघ पदाधिकारियों ने बताया कि 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कक्षा 1 से 8वीं तक अध्यापन कराने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना आवश्यक माना गया है। इस निर्णय से विशेष रूप से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के भविष्य और सेवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
20 लाख से अधिक शिक्षकों के हित का मुद्दा
शिक्षक संघ का कहना है कि यह मामला केवल मध्यप्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके परिवारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
पूर्व प्रभाव से नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं
संघ ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि भारतीय विधिक और प्रशासनिक व्यवस्था का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम, अधिसूचना अथवा नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पहले से विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बनाए गए पात्रता मानदंड लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता तथा विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत माना जाना चाहिए।
केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के अर्जित सेवा अधिकारों और रोजगार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हित प्रभावित न हों।
18 जून को प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान
संघ ने बताया कि 18 जून को प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों की चिंताओं से अवगत कराया जाएगा और इस विषय में आवश्यक राहत एवं समाधान की मांग की जाएगी।
1. एन.सी.टी.ई. द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अधिसूचना 23 अगस्त 2010 के पूर्व से नियुक्त प्रदेश एवं देश के समस्त शिक्षकों को स्थायी रूप से मुक्त किया जावें।
2. 18 जून 2026 को जिला स्तर पर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा शिक्षा माननीय प्रधानमंत्री एवं दो केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार को देगा ज्ञापन ।
3. राष्ट्र निर्माता, शिक्षकों को (टेट) परीक्षा से दी जाए राहत।
4. 23 अगस्त 2010 को एन.सी.टी.ई. द्वारा जारी अधिसूचना टेट परीक्षा को लेकर 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट दी जावें।
5. जो शिक्षक राज्य स्तरीय संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा 2005, 2003 2008, 2008 में उत्तीर्ण है उन्हें (टेट) से मुक्त रखा जावें। 2005
6. मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा डेढ़लाख शिक्षकों के हितों और भविष्य संरक्षण को लेकर (टेट) परीक्षा के संबंध में 18 जून को दिया जाएगा प्रधानमंत्री के नाम से ज्ञापन।




